स्टार वार्स के दीवानों के लिए इस साल का ‘मे द फोर्थ’ सिर्फ एक आम दिन का जश्न नहीं है। यह असल में 22 मई को रिलीज होने वाली ‘स्टार वार्स: द मैंडलोरियन एंड ग्रोगू’ के एक महीने लंबे और बेचैन करने वाले इंतजार की शुरुआत है। जरा सोचिए, 2019 की ‘द राइज ऑफ स्काईवॉकर’ के पूरे सात साल बाद यह फ्रैंचाइज़ी वापस बड़े पर्दे का रुख कर रही है। पेड्रो पास्कल अपने मशहूर किरदार दिन जारिन में लौट रहे हैं और उनके साथ है उनका नन्हा शागिर्द ग्रोगू — जिसे सीज़न दो में उसका असली नाम पता चलने तक इंटरनेट पर सब प्यार से ‘बेबी योडा’ बुलाते थे। अप्रैल 2023 में जहाँ तीसरे सीज़न की कहानी छूटी थी, जॉन फेवरू, डेव फिलोनी और नोआ क्लूर की लिखी यह नई फिल्म वहीं से धागे जोड़ेगी।

आखिर स्टार वार्स की इस उलझी हुई टाइमलाइन में यह कहानी खड़ी कहाँ है?

अगर आप इस विशाल यूनिवर्स के गणित को समझना चाहते हैं, तो पूरी टाइमलाइन 1977 की ‘एपिसोड IV: ए न्यू होप’ के उस पल के इर्द-गिर्द घूमती है जहाँ रिबेल एलायंस और ल्यूक स्काईवॉकर ने डेथ स्टार को तबाह किया था। इसे बैटल ऑफ याविन कहते हैं। इसी के आधार पर घटनाओं को BBY (Before the Battle of Yavin) और ABY में मापा जाता है। हालांकि इस नई फिल्म का सटीक समय अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन सीरीज़ की ज़्यादातर घटनाएँ 9 ABY के आसपास ही रची गई थीं। मतलब उस महायुद्ध के करीब नौ साल बाद। इसी टाइमलाइन के पन्नों में ‘द बुक ऑफ बोबा फेट’ और ‘असोका’ जैसी सीरीज़ भी पनपीं, जिसके चलते इन शोज़ में किरदारों का आपस में टकराना और क्रॉसओवर मुमकिन हो पाया।

132 BBY के आसपास सेट ‘द एकोलाइट’ और ‘टेल्स’ एनिमेटेड सीरीज की कुछ कहानियों को किनारे कर दें, तो ज्यादातर स्टार वार्स फिल्में स्काईवॉकर परिवार की चार पीढ़ियों के उस 67 साल के दायरे में ही सिमटी हैं जो ‘द फैंटम मेनेस’ से शुरू होकर ‘द राइज ऑफ स्काईवॉकर’ पर खत्म होती है। 2019 में जब ‘द मैंडलोरियन’ पहली बार आई थी, तो वह टेलीविजन पर पहली लाइव-एक्शन सीरीज़ थी। उसके बाद से डिज़्नी प्लस ने ‘ओबी-वॉन केनोबी’ और ‘एंडोर’ (जो ‘रोग वन’ का दो-सीज़न वाला प्रीक्वेल है) जैसे शोज़ के जरिए इस ब्रह्मांड को लगातार फैलाया है।

खिलौनों का बाजार और जेब पर भारी पड़ता अल्टीमेट ग्रोगू

फिल्म अपनी जगह है, लेकिन मार्केटिंग के मौके भुनाने में डिज़्नी का कोई सानी नहीं। इस फिल्म की हाइप और ‘स्टार वार्स डे’ का फायदा उठाने के लिए डिज़्नी ने ठीक इसी वक्त ‘अल्टीमेट ग्रोगू’ नाम का एक नया इंटरेक्टिव खिलौना बाजार में उतारा है। हैस्ब्रो और डिज़्नी ने इसे अपनी तरह का पहला एनिमेट्रोनिक फिगर बताया है जिसमें 250 से ज्यादा एनिमेशन, साउंड्स और तरह-तरह के मोड्स दिए गए हैं।

हैस्ब्रो के एक्शन ब्रांड्स के प्रमुख एडम बीहल का दावा है कि उनकी टीम ने द मैंडलोरियन सीरीज़ में इस किरदार की हरकतों को घंटों तक बारीकी से परखा है ताकि फैंस को लगे कि ग्रोगू सच में उनकी दुनिया का हिस्सा बन गया है। लुकासफिल्म की उस स्क्रीन वाली जादूगरी को एक खिलौने में उतारना वाकई काबिले तारीफ है। उनका मिशन कामयाब भी रहा, क्योंकि यह देखने में बिल्कुल शो वाले पपेट जैसा ही लगता है और काफी सजीव महसूस होता है।

मैं खुद स्टार वार्स का एक कट्टर फैन हूँ, तो कायदे से मुझे इस अल्टीमेट ग्रोगू के लिए पागल हो जाना चाहिए था। लेकिन फिर मेरी नजर इसकी कीमत पर पड़ी और मेरे होश उड़ गए। इसकी कीमत 600 डॉलर रखी गई है। दिमाग खराब है क्या? 600 डॉलर सिर्फ इस चीज के लिए?! आज 2026 में 600 डॉलर की वो अहमियत नहीं रही जो पहले हुआ करती थी। गेम्स, कंप्यूटर, पेट्रोल और राशन के लगातार आसमान छूते दामों के बीच, मैं तो कम से कम एक इंटरेक्टिव बेबी योडा पर इतना पैसा फूंकने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूँ। यह कितना भी सजीव क्यों न हो, हकीकत यही है कि कुछ ही दिनों के बाद यह बस मेरी किसी शेल्फ पर पड़ा धूल ही खाने वाला है।