फ़्रेंच ओपन (रोलां गैरोस) बस सिर पर है और इस बार पेरिस की लाल बजरी पर माहौल थोड़ा अलग है। एक तरफ जैनिक सिनर हैं, जिनका क्ले कोर्ट पर जलवा राफेल नडाल के उस सुनहरे दौर की याद दिला रहा है। लगातार पांच मास्टर्स 1000 खिताब अपने नाम कर चुके 24 वर्षीय इटैलियन खिलाड़ी इस वक्त एक अलग ही ज़ोन में खेल रहे हैं। रोम और मोंटे कार्लो में अपना परचम लहराने के बाद उनका मुख्य लक्ष्य पेरिस में अपना करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करना है, जहां वो खिताब के सबसे बड़े दावेदार के रूप में उतरेंगे। क्या सिनर का खेल ‘पीक’ जोकोविच से भी बेहतर है? टेनिस जगत में अक्सर अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए जाने जाने वाले फ्रांसीसी कोच पैट्रिक मौरातोग्लू ने इस बार एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है। उनका साफ मानना है कि क्ले कोर्ट पर सिनर का मौजूदा गेम नोवाक जोकोविच के 2011 और 2015 वाले ‘पीक’ दौर से भी ज्यादा असरदार है। यह दावा अपने आप में काफी भड़काऊ लग सकता है क्योंकि जोकोविच के नाम क्ले पर 11 मास्टर्स 1000 और 3 रोलां गैरोस खिताब दर्ज हैं, जिसमें खुद ‘किंग ऑफ क्ले’ राफेल नडाल को दो बार धूल चटाना शामिल है। किसी भी खिलाड़ी की तुलना उस दौर के जोकोविच से करना ही बड़ी बात है, लेकिन मौरातोग्लू इसे तकनीकी नज़रिए से देखते हैं। उनका तर्क है कि 2011 और 2015 में अपने चरम पर होने और टूर पर राज करने के बावजूद नोवाक पेरिस में खिताब नहीं जीत पाए थे। इसके उलट, सिनर क्ले पर नेट के ऊपर से ज्यादा मार्जिन लेकर खेलते हैं। उनके ग्राउंडस्ट्रोक्स कहीं ज्यादा भारी और सटीक होते हैं। लंबी रैलियों और थका देने वाले मुकाबलों में शॉट्स की यही क्वालिटी सिनर को बाकी खिलाड़ियों से काफी आगे कर देती है। अनुभव बनाम युवा जोश: जोकोविच को कम आंकना सबसे बड़ी भूल होगी सिनर के इस तूफानी प्रदर्शन को देखकर यह सवाल लाज़मी है कि क्या कोई उनके इस विजय रथ को रोक सकता है? करीब दो महीने तक चोट के कारण बाहर रहने के बाद जोकोविच रोम मास्टर्स से वापसी कर रहे हैं। इस महीने के आखिर में वो 39 साल के हो जाएंगे और 2026 में उन्होंने बमुश्किल दो ही टूर्नामेंट खेले हैं। ऐसे में उनकी फिटनेस और क्ले जैसे थकाऊ सरफेस पर दो हफ्तों के ग्रैंड स्लैम का दबाव झेलने की क्षमता पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। कागजों और आंकड़ों के हिसाब से जोकोविच की दावेदारी शायद उतनी मजबूत न लगे, लेकिन पूर्व फ्रांसीसी खिलाड़ी अर्नौड क्लेमेंट गेम को एक अलग चश्मे से देखते हैं। क्लेमेंट का मानना है कि पांच सेट के मैराथन मुकाबले में सिनर को टक्कर देने का माद्दा आज भी सिर्फ और सिर्फ जोकोविच में ही है। उम्र और हालिया फिटनेस को देखते हुए यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन नोवाक का अनुभव, एंड्योरेंस और लंबी रैलियों को मैनेज करने की कला उन्हें आज के युवा दिग्गजों के सामने भी एक खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाती है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में नोवाक ने एक शानदार प्रदर्शन करते हुए सिनर को पांच सेटों के रोमांचक मुकाबले में मात दी थी। 2025 की शुरुआत से लेकर अब तक वो हर मेजर के सेमीफाइनल में पहुंचे हैं और कार्लोस अल्काराज़ व जैनिक सिनर दोनों को हरा चुके हैं। असल पेंच जोकोविच के फॉर्म या लेवल का नहीं है, बल्कि रोलां गैरोस में उनके रास्ते का है। टूर्नामेंट में टॉप फेवरेट के तौर पर उतर रहे सिनर से खिताबी भिड़ंत या सेमीफाइनल तक पहुंचने से पहले नोवाक को ड्रॉ में मौजूद कई खतरनाक विरोधियों से पार पाना होगा। 39 की उम्र में लगातार मुश्किल मैच खेलकर अपनी एनर्जी बचाए रखना उनके लिए सबसे बड़ा चैलेंज होगा। बीते दो दशकों में जोकोविच ने सब कुछ हासिल कर लिया है, फिर भी बड़े मंचों पर एलीट टेनिस खेलने और खिताब जीतने की उनकी भूख ज़रा भी कम नहीं हुई है। पेरिस की मिट्टी पर इस बार मुकाबला सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि सिनर की बेदाग फॉर्म और जोकोविच की उस जिद्दी मानसिकता का है, जो उन्हें कभी हार ना मानने वाला चैंपियन बनाती है। पोस्ट नेविगेशन इंडिया कैप की गरिमा सर्वोपरि: आर अश्विन ने ‘सेकंड स्ट्रिंग’ टीम के विचार को नकारा, प्रियांश आर्या को बताया भविष्य का स्टार