आजकल भारतीय सिनेमाघरों में दो अलग-अलग तरह के माहौल देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ थिएटर्स में पुरानी यादों और एक्शन का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है, तो दूसरी तरफ माइथोलॉजिकल फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया पर एक गहरी सांस्कृतिक बहस छिड़ गई है। बॉक्स ऑफिस के आंकड़े और लोगों की आस्था, दोनों ही इस वक्त इंडस्ट्री के केंद्र में हैं।

टिकट खिड़की पर ‘बॉर्डर 2’ का एकतरफा राज

सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर जमकर गदर काट रही है। अनुराग सिंह के डायरेक्शन में बनी इस वॉर ड्रामा ने रिलीज होते ही थिएटर्स को अपने पूरी तरह से कब्जे में ले लिया है। फिल्म को रिलीज हुए एक हफ्ता पूरा हो चुका है, लेकिन इसकी कमाई की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। 23 जनवरी को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में उतरी, तो पहले ही दिन इसने 30 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस कर डाला। वीकेंड पर तो जैसे दर्शकों का सैलाब ही आ गया—दूसरे दिन 36.5 करोड़ और तीसरे दिन सीधे 54.5 करोड़ रुपये की छप्पर फाड़ कमाई हुई।

आठवें दिन भी फिल्म ने 10.33 करोड़ रुपये अपने खाते में जोड़े हैं। इसके साथ ही फिल्म का कुल कलेक्शन अब 234.58 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। दिलचस्प बात ये है कि रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी 3’ भी इसी बीच रिलीज हुई है, लेकिन सनी पाजी की दहाड़ के आगे इस क्लैश का कोई खास असर नहीं दिखा। अहान शेट्टी, वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ जैसे सितारों से सजी इस फिल्म में अक्षय खन्ना और सुनील शेट्टी के कैमियो ने फैंस का मजा दोगुना कर दिया है। 1997 की कल्ट क्लासिक ‘बॉर्डर’ का यह सीक्वल लोगों को इसलिए भी बांधे हुए है क्योंकि फिल्म की कहानी के साथ-साथ ‘संदेशे आते हैं…’ जैसे गानों की पुरानी यादें आज भी दर्शकों के दिलों में एकदम ताज़ा हैं।

भगवान सुब्रमण्यम की कहानी और भावनाओं का टकराव

अब जहां नॉर्थ में ताबड़तोड़ कमाई का जश्न मन रहा है, वहीं पैन-इंडिया स्तर पर एक नए प्रोजेक्ट ने इंडस्ट्री में एक अलग तरह की हलचल पैदा कर दी है। एनटीआर (NTR) और डायरेक्टर त्रिविक्रम के अपकमिंग प्रोजेक्ट के ऐलान ने तेलुगु सिनेमा में जबरदस्त उत्साह तो भरा है, लेकिन भगवान सुब्रमण्यम (मुरुगन) के जीवन पर आधारित इस माइथोलॉजिकल फिल्म के साथ एक बड़ा विवाद भी जुड़ गया है।

खासकर तमिल सिनेप्रेमियों का एक वर्ग मेकर्स की कुछ क्रिएटिव चॉइस से खफा नजर आ रहा है। उनकी सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर है कि फिल्म के अनाउंसमेंट पोस्टर में तमिल की जगह संस्कृत के श्लोकों का इस्तेमाल किया गया। इस आग में घी डालने का काम प्रोड्यूसर नागा वामसी के एक कैप्शन ने किया, जहां उन्होंने भगवान मुरुगन का जन्म उत्तर भारत में होने का जिक्र कर दिया। इस बयान पर कई तमिल यूजर्स ने कड़ा एतराज जताते हुए याद दिलाया कि भगवान मुरुगन की जड़ें और उनका मूल स्थान तमिलनाडु से जुड़ा है। तमिल संस्कृति और परंपरा में उनकी जगह बेहद खास है। ऐसे में लोग लगातार अपील कर रहे हैं कि इतने बड़े स्केल की फिल्म में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बारीकियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ हैंडल किया जाना चाहिए।

हालांकि, कई फैंस ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि अभी सिर्फ फिल्म की घोषणा हुई है और इतनी जल्दी कोई भी राय बना लेना बेवकूफी होगी। उनका कहना है कि जब तक कहानी और मेकर्स का असली विजन सामने नहीं आता, तब तक थोड़ा सब्र रखना चाहिए। त्रिविक्रम अपनी बेहतरीन राइटिंग के लिए जाने जाते हैं और जब एनटीआर जैसा सुपरस्टार लीड रोल में हो, तो उम्मीदें आसमान छूना लाजिमी है।