कविता और साहित्य सदैव मानव अस्तित्व, मृत्यु और जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने का माध्यम रहे हैं। चाहे वह पंद्रहवीं शताब्दी के संत कबीर हों या इक्कीसवीं सदी के आधुनिक अमेरिकी कवि, शब्दों के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार की प्रक्रिया निरंतर जारी है। इस लेख में हम कबीर की कालजयी वाणी और ‘डिज़ाइन मैटर्स’ की २०वीं वर्षगांठ पर आधुनिक कवियों के विचारों के बीच एक अद्भुत समानता और निरंतरता का विश्लेषण करेंगे।

कबीर की वाणी: जीवन और मृत्यु का दर्शन

संत कबीर के दोहे केवल कविताएं नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाले सूत्र हैं। कबीर जीवन की नश्वरता और अहंकार के त्याग पर गहरा जोर देते हैं। उनका मानना है कि जो व्यक्ति जीवित रहते हुए ही ‘मरना’ जानता है—अर्थात अपने अहंकार को समाप्त कर देता है—वही वास्तव में अजर-अमर हो जाता है। जब तक शरीर में वासना और अहंकार है, तब तक मुक्ति संभव नहीं है।

कबीर मन की चंचलता के प्रति भी सचेत करते हैं। वे कहते हैं कि मन एक बालक की तरह है, जिसे हम मृत (शांत) समझकर भूल कर बैठते हैं, लेकिन वह भूत बनकर फिर से हमारे पीछे लग जाता है। इसलिए, एक साधक को कभी भी अपने मन पर पूर्ण विश्वास नहीं करना चाहिए। जब तक शरीर में सांस है, तब तक मन कभी भी धोखा दे सकता है और साधक को साधना के मार्ग से विचलित कर सकता है।

सत्संग और गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कबीर कहते हैं कि जिस प्रकार सूप अनाज को रखकर कूड़े को बाहर कर देता है, उसी प्रकार सत्संग हमारे भीतर के विकारों को दूर करता है। वे चेतावनी देते हैं कि हमें केवल उन्हीं भक्तों के जाने पर शोक नहीं करना चाहिए जो अपना कल्याण करके गए हैं, बल्कि उन अज्ञानियों के लिए रोना चाहिए जो बार-बार जन्म-मरण के चक्र में फंसने जा रहे हैं। कबीर का स्पष्ट संदेश है कि यदि आप उनके मार्ग पर चलना चाहते हैं, तो आपको ज्ञान की मशाल हाथ में लेकर अपने मोह-माया रूपी घर को जलाना होगा।

डिज़ाइन मैटर्स: आधुनिक काव्य का उत्सव

कबीर जिस ‘शब्द’ और विचार की गहराई की बात करते थे, वही गूंज आज के आधुनिक दौर में भी सुनाई देती है। ‘डिज़ाइन मैटर्स’ पॉडकास्ट की २०वीं वर्षगांठ के अवसर पर डेबी मिलमैन ने इसी काव्य परंपरा को आगे बढ़ाया है। इस विशेष कड़ी में एलीन मायल्स, एलिजाबेथ अलेक्जेंडर, सारा के और एम्बर टैम्बलिन जैसे प्रख्यात कवियों के साथ हुई बातचीत को पुनर्जीवित किया गया। ये चर्चाएं भाषा, पहचान, स्मृति और उन जीवंत अनुभवों पर केंद्रित थीं जो किसी रचना की नींव बनते हैं।

एलिजाबेथ अलेक्जेंडर का कहना है कि कई बार वे घटनाओं को वैसे याद नहीं करतीं जैसे वे घटित हुई थीं, बल्कि वैसे याद करती हैं जैसे उन्होंने उन्हें लिखा था। वहीं, एलीन मायल्स का मानना है कि आप जो कुछ भी लिखते हैं, उसके डीएनए में वह सब कुछ मौजूद होता है जो आप भविष्य में लिखने वाले हैं। यह कबीर के उस दर्शन से मेल खाता है जहां ‘शब्द’ ही सत्य है।

साक्षात्कार की कला और कवियों का दृष्टिकोण

डेबी मिलमैन अपने पॉडकास्ट में अक्सर डिजाइनरों और कलाकारों से उनकी रचनात्मक प्रक्रियाओं पर बात करती हैं। चूंकि यह एक ऑडियो माध्यम है, इसलिए दृश्य कलाओं पर चर्चा करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। संगीतकार तो अपनी कला का प्रदर्शन गिटार बजाकर कर सकते हैं, लेकिन कवियों के साथ स्थिति अलग होती है। कवि अपनी कविताओं का पाठ करते हैं, जो श्रोताओं के लिए एक उपहार समान होता है।

सारा के ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि काव्य पाठ के दौरान ऐसा महसूस होता है जैसे पूरा कमरा यह संदेश दे रहा हो कि “यहाँ तुम्हारे लिए जगह है।” वहीं एम्बर टैम्बलिन ने अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि उनके भीतर का एक पूरा हिस्सा मर रहा था, जिसे कविता ने स्वर दिया।

एलीन मायल्स: एक ‘पेशेवर इंसान’ की भूमिका

न्यूयॉर्क के ईस्ट विलेज की साहित्यिक पहचान बन चुकीं एलीन मायल्स, जो पिछले ५० वर्षों से लेखन कर रही हैं, कविता को एक नौकरी से बढ़कर मानती हैं। २०१७ में डेबी मिलमैन के साथ हुई बातचीत में मायल्स ने बताया कि जब लोग उनसे पूछते हैं कि वे क्या करती हैं, तो ‘कवि’ जवाब सुनने पर लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी होती है मानो उन्होंने खुद को ‘मूक अभिनेता’ (माइम) बता दिया हो।

मायल्स का मानना है कि कवि होना एक तरह से “पेशेवर इंसान” (Professional Human) होने जैसा है। जिस तरह महाकाव्यों में नायक होते हैं, वैसे ही आधुनिक जीवन की गाथा में कवि ही वह सूत्रधार है जो दिन-प्रतिदिन के जीवन को अर्थ देता है। यह कहानी रेखीय नहीं होती, बल्कि यह अस्तित्व के प्रश्न—”यहाँ क्या है?”—को संबोधित करती है।

जीवन बदलने वाले संयोग

जीवन की दिशा कैसे बदलती है, इसका उदाहरण एलीन मायल्स के जीवन से मिलता है। १९७५ में एक कैफे में पॉल वियोली से हुई उनकी आकस्मिक मुलाकात ने उन्हें सेंट मार्क्स चर्च की वर्कशॉप तक पहुँचाया, जहाँ से उनका साहित्यिक सफर शुरू हुआ। मायल्स ने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह दर्शाया है कि ७० के दशक में न्यूयॉर्क में एक महिला कवि के रूप में अपनी जगह बनाना कितना चुनौतीपूर्ण था। उस समय कला जगत में कोई एक शिखर नहीं था, बल्कि “ढेर सारी छोटी-छोटी चोटियाँ” थीं, और यही स्थिति कविता की दुनिया की भी थी।