फरवरी का महीना अपने साथ कई ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के दिन लेकर आता है। एक तरफ जहां आज पूरा महाराष्ट्र अपने सबसे बड़े नायक को याद कर रहा है, वहीं श्रद्धालु इस महीने के अंत में आने वाले एक बेहद अहम व्रत की तैयारियों में जुटे हैं। आज 19 फरवरी को महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही है, जिसके चलते राज्य में सार्वजनिक अवकाश है। इसके ठीक एक हफ्ते बाद 27 फरवरी को हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व आमलकी एकादशी मनाया जाएगा। आइए इन दोनों महत्वपूर्ण तिथियों, उनसे जुड़े अवकाशों और पूजा-विधान पर विस्तार से नजर डालते हैं।

महाराष्ट्र में आज बैंक बंद, शिवाजी जयंती पर विशेष अवकाश आज गुरुवार, 19 फरवरी को महाराष्ट्र के मुंबई, नागपुर और बेलापुर समेत तमाम इलाकों में सरकारी और निजी बैंक बंद हैं। वजह है राज्य का सबसे गौरवशाली दिन यानी छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती। यह दिन महाराष्ट्र में सार्वजनिक अवकाश के तौर पर घोषित है, इसलिए एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और पीएनबी जैसी सभी प्रमुख बैंक शाखाओं में आज कोई कामकाज नहीं होगा।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नियमों के मुताबिक, बैंकों की छुट्टियां अलग-अलग राज्यों के हिसाब से तय होती हैं। इन्हें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, आरटीजीएस हॉलिडे और बैंकों के खाता बंद होने की श्रेणियों में बांटा गया है। सीधे शब्दों में कहें तो आज महाराष्ट्र में छुट्टी जरूर है, लेकिन दिल्ली या कोलकाता में बैंक अपने तय समय पर खुले रहेंगे। इससे पहले फरवरी में 1, 8 और 15 तारीख को रविवार तथा 14 को दूसरे शनिवार की नियमित छुट्टियां थीं। वहीं 18 फरवरी को सिक्किम के गंगटोक में तिब्बती नववर्ष ‘लोसर’ के मौके पर भी बैंक बंद रहे थे।

मराठा साम्राज्य के संस्थापक की विरासत शिवाजी महाराज का जन्म 1630 में पुणे में हुआ था और उन्हें पूरे भारत और खासकर महाराष्ट्र के आदर्श के रूप में देखा जाता है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि शिवाजी महाराज की जयंती मनाने की शुरुआत 1870 में महात्मा ज्योतिबा फुले ने पुणे से की थी। इसके बाद 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने इस उत्सव को और अधिक लोकप्रिय बनाया, ताकि लोगों को एकजुट किया जा सके। आज यह दिन पूरे राज्य में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है।

मोक्ष और सौभाग्य का प्रतीक: आमलकी एकादशी इस ऐतिहासिक उत्सव के बाद धार्मिक दृष्टिकोण से 27 फरवरी 2026 का दिन बेहद खास रहने वाला है। फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है, जिसे कई लोग आंवला या रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवले के पेड़ में साक्षात भगवान विष्णु का वास होता है। इस दिन विष्णु जी के साथ-साथ आंवले के पेड़ की पूजा करने से इंसान को विशेष पुण्य मिलता है और जीवन की तमाम बाधाएं खत्म हो जाती हैं। कथाओं में जिक्र आता है कि राजा वसुरथ ने इसी व्रत के प्रताप से अपना खोया हुआ राज्य और प्राण दोनों वापस पाए थे। काशी में तो इसी दिन से होली का उत्सव भी शुरू हो जाता है, जो इस दिन की महत्ता को और बढ़ा देता है।

व्रत का शुभ मुहूर्त और पारण का समय साल 2026 में फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि 27 फरवरी को रात 12 बजकर 33 मिनट पर शुरू हो जाएगी और उसी दिन रात 10 बजकर 32 मिनट पर इसका समापन भी होगा। उदया तिथि को आधार मानते हुए 27 तारीख को ही यह व्रत रखा जाएगा। जो लोग यह व्रत करेंगे, वे अगले दिन यानी 28 फरवरी की सुबह 6 बजकर 47 मिनट से लेकर 9 बजकर 6 मिनट के बीच अपना व्रत खोल सकेंगे। इस दिन द्वादशी तिथि रात 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि पारण के समय हरि वासर दोष नहीं है, जिससे व्रत खोलने का यह समय पूरी तरह से शुभ माना जा रहा है।

कैसे करें श्रीहरि की पूजा आमलकी एकादशी की सुबह सूर्य उगने से पहले उठकर नहाना चाहिए। मन में व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं। विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाकर पीले फूलों की माला पहनाएं। प्रसाद में तुलसी के पत्ते जरूर डालें क्योंकि इसे बहुत पवित्र माना जाता है। भोग में आंवला, मौसमी फल, पंचामृत और कुछ मीठा रख सकते हैं।

अगर आपके घर के आस-पास आंवले का पेड़ है, तो वहां जाकर उसकी जड़ के पास कलश स्थापित करें। पेड़ की रोली, चंदन, फूल और दीये से पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करें। इसके बाद शांत मन से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। फिर आमलकी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में भगवान विष्णु की आरती उतारें और अगर पूजा में अनजाने में कोई भूल हो गई हो तो उसके लिए क्षमा मांग लें। अगले दिन द्वादशी के शुभ मुहूर्त में किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान-दक्षिणा देने के बाद ही अपना व्रत खोलें।