ट्रंप के फैसले और बाजार का हाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्लान को लेकर बाजार में मची भारी अनिश्चितता के बीच सोमवार को सोने की कीमतों में दो प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने करों पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में उन्होंने अमेरिकी आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत की कानूनी अधिकतम सीमा तक ले जाने का ऐलान कर दिया। इसी घबराहट के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग अचानक तेज हो गई। हाजिर सोना 2 फीसदी चढ़कर 5,206.39 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जो 30 जनवरी के बाद से इसका सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 29 जनवरी को सोना 5,594.82 डॉलर प्रति औंस के अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड को छू चुका था। उधर, अप्रैल डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 2.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5,225.60 डॉलर पर सेटल हुए। अन्य कीमती धातुओं की स्थिति देखें तो हाजिर चांदी 3.2 प्रतिशत उछलकर 87.23 डॉलर पर पहुंच गई। वहीं, प्लैटिनम 0.7% गिरकर 2,140.75 डॉलर पर आ गया और पैलेडियम 0.1% बढ़कर 1,750.53 डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

महंगाई और चीनी बाजार का प्रभाव आने वाले दिनों में बाजार की यह हलचल और तेज होने के आसार हैं। सीपीएम ग्रुप के मैनेजिंग पार्टनर जेफरी क्रिश्चियन का मानना है कि दुनिया भर में मौजूद आर्थिक व राजनीतिक संकटों के बीच इस हफ्ते सोने में और बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। लूनर न्यू ईयर की वजह से चीन का बाजार शांत था। चीन सोने का एक बहुत बड़ा उपभोक्ता है और मंगलवार को वहां बाजार खुलते ही मांग में भारी इजाफा होने की उम्मीद है। क्रिश्चियन के मुताबिक अगले कुछ तिमाहियों तक सोने की कीमतों का बढ़ना जारी रहेगा और यह नए रिकॉर्ड भी बनाएगा। अमेरिका में शुक्रवार को आए आर्थिक आंकड़ों ने भी बाजार की स्थिति को प्रभावित किया है। दिसंबर में अमेरिकी महंगाई दर उम्मीद से कहीं ज्यादा रही, जबकि चौथी तिमाही में आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ गई। इन आंकड़ों को देखकर लगता है कि फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। निवेशक अब फेड अधिकारियों के बयानों और अमेरिका-ईरान विवाद से जुड़े हर छोटे-बड़े अपडेट पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

ऊंचे दामों के बीच कैरेट का महत्व जब सोने की कीमतें वैश्विक स्तर पर ऐसे नए रिकॉर्ड बना रही हों, तो इसमें पैसा लगाना एक बड़ा और संवेदनशील फैसला बन जाता है। भारत में सोना महज सजने-संवरने तक सीमित नहीं है, इसे हमेशा से निवेश और सुरक्षित संपत्ति का एक बड़ा जरिया माना गया है। आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में बहुत से खरीदार बाजार में ‘कैरेट’ का सही मतलब जाने बिना ही भारी निवेश कर बैठते हैं। कैरेट मूल रूप से सोने की शुद्धता मापने का एक पैमाना होता है। यह तय करता है कि आप जो आभूषण या सिक्का खरीद रहे हैं, उसमें असल सोने की मात्रा कितनी है। इसका अधिकतम पैमाना 24 होता है, जिसका सीधा सा मतलब है कि यह सोना पूरी तरह यानी 99.9 प्रतिशत शुद्ध है।

शुद्धता के आधार पर सोने के प्रकार बाजार में आमतौर पर चार तरह के कैरेट का चलन सबसे ज्यादा देखा जाता है। 24 कैरेट सबसे शुद्ध रूप है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सोने के बिस्किट या सिक्के बनाने में होता है। चूंकि यह सोना बेहद नरम होता है, इसलिए इससे गहने नहीं गढ़े जा सकते। अगर आप गहने बनवा रहे हैं, तो उसके लिए 22 कैरेट सोने को सबसे बेहतर माना जाता है। इसमें 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है और बाकी हिस्से में मजबूती देने के लिए अन्य धातुएं मिला दी जाती हैं। जो लोग थोड़े डिजाइनर या जटिल बनावट वाले गहनों की तरफ जाते हैं, उनके लिए 18 कैरेट काम आता है जिसमें लगभग 75 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है। इसके अलावा 14 कैरेट में महज 58.5 प्रतिशत सोना बचता है, जो आमतौर पर हल्के और सस्ते गहने बनाने के काम आता है। सोने की बाजार में सीधा सा नियम है कि कैरेट की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, उसकी कीमत भी उतनी ही अधिक होगी।

हॉलमार्क और सुरक्षित निवेश के तरीके जानकारों की स्पष्ट राय है कि मौजूदा उच्च कीमतों वाले बाजार में खरीदारों को अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। कैरेट की सही जानकारी न होने पर कोई भी ज्वेलर आपको कम शुद्धता वाला सोना ऊंचे दाम पर थमा सकता है। निवेश के लिहाज से लोग 24 कैरेट को ही प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इसकी शुद्धता ज्यादा होने के कारण भविष्य में सबसे बेहतर कीमत मिलती है। धोखाधड़ी और नुकसान से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका हॉलमार्क वाली ज्वेलरी खरीदना है। भारत में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा हॉलमार्किंग की जाती है। गहनों पर बना यह निशान कैरेट, शुद्धता का प्रतिशत और पहचान चिह्न स्पष्ट रूप से प्रमाणित कर देता है। आप अपनी तसल्ली के लिए दुकान पर मौजूद कैरेट मीटर मशीन से भी इसे चेक करवा सकते हैं। बड़े निवेश के मामले में जरूरत पड़ने पर किसी भी प्रयोगशाला में सोने की जांच कराई जा सकती है। जब भी आप सोना खरीदें, तो सिर्फ उसकी डिजाइन या कीमत के बहकावे में न आएं, बल्कि उसकी असली शुद्धता को परखकर ही अपनी गाढ़ी कमाई का सौदा करें।