बुधवार, 12 अगस्त 2020 | 08:32 IST
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भले टीम इंडिया हार गई, लेकिन सर रवीन्द्र जडेजा ने दिल लूट लिया


न्यूजीलैण्ड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में जब टीम इंडिया के सारे धुरंधर बल्लेबाज एक एक करके पवैलियन लौट गए थे। टीम इंडिया बेहद शर्मनाक प्रदर्शन

 

के कारण सुर्खियों में थी- 71 रन पर पांच विकेट गिर चुके थे। टारगेट था 240 रन। तब धोनी का साथ देने मैदान में उतरे ऑल राउंडर रवीन्द्र जडेजा।

जिस पिच पर रोहित शर्मा, विराट कोहली, लोकेश राहुल, दिनेश कार्तिक गेंद सूंघकर निकल गए थे। जहां ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या भी कोई बड़ा कमाल नहीं करपाए, वहां टीम इँडिया की इज्जत बचाने की जिम्मेदारी संभाली सर रवीन्द्र जडेजा ने। उसी पिच पर जडेजा ने शुरुआत से ही ऐसा नजारा पेश किया कि आंसुओं से सराबोर हिन्दुस्तानी फैन्स के चेहरे पर खुशी लौटने लगी। एक के बाद एक चौके, दे दनानद छक्के- जडेजा ऐसे बल्लेबाजी कर रहे थे, जैसे आमतौर पर रोहित शर्मा करते हैं। केवल 39 गेंदों में अर्धशतक पूरा करने के बाद जडेजा ने

अपने खास अंदाज में बल्ला लहराकर सेलीब्रेट किया, तो सबको लगने लगा कि वे मैच जिताकर ही लौटेंगे। दूसरे छोर पर धोनी लगातार संभलकर खेल रहे थे, ताकि विकेट गिरने का सिलसिला न शुरू हो जाए।  जडेजा का विश्व कप में दूसरा मैच था, ल किन पहले में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था। इस बार

 

उन्होंने बगैर किसी दबाव के बल्लेबाजी की और कीवी गेंदबाजों से बिल्कुल भी नहीं डरे। 58 गेंद पर 77 रन बनाकर जब वे छक्का मारने के प्रयास में कैच आउट हुए तभी टीम इंडिया की उम्मीदें भी बुझने लगीं। स्टेडियम में हर कोई जडेजा के हौसले को सलाम कर रहा था।

उसके बाद 50 रन बनाकर धोनी रन आउट हो गए। पूरी टीम 221 रन पर आउट हो गई और टीम इंडिया 18 रन से हारकर वर्ल्ड कप से बाहर हो गया। टीम इंडिया भले ही जीत के नजदीक पहुंचकर हार गई हो, लेकिन जडेजा ने दिखा दिया कि अगर शुरुआती बल्लेबाजी ने ऐसा हौसला दिखाया होता तो आज टीम फाइनल में होती।

हिमालयन न्यूज़ के लिए नवीन पाण्डेय की रिपोर्ट 



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