मंगलवार, 14 जुलाई 2020 | 02:12 IST
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राज्यसभा के 250वें सत्र पर बोले प्रधानमंत्री मोदी,देश में लंबा कालखंड ऐसा रहा जब विपक्ष नहीं था


 संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को शुरू हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद का शीतकालीन सत्र आरंभ होने से पहले कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है. शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से आरंभ होकर 13 दिसंबर तक चलेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्र के दौरान उच्च स्तर की चर्चाएं होनी चाहिए जिसमें सभी सांसद शामिल हों. सत्र प्रारंभ होने से पहले उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं.' संसद के सत्र के दौरान सुस्त होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, किसानों के संकट और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेताओं की हिरासत को लेकर बात हो सकती है. महाराष्ट्र की अस्थिर राजनीतिक स्थिति की पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चा होगी. जहां सत्तारूढ़ बीजेपी लंबे समय से सहयोगी रही शिवसेना से अलग हो गई है. अब यहां सरकार गठन के लिए शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन द्वारा एकजुट होने के लिए तैयार है. इस सत्र में जिन प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होनी है उनमें नागरिकता संशोधन विधेयक शामिल है, जिसे सरकार अपने पिछले कार्यकाल में पारित नहीं करा पाई थी.यह एक ऐतिहासिक सत्र होगा क्योंकि इस बार राज्यसभा की 250 वीं बैठक होगी।   

पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में एनसीपी और बीजेडी की तारीफ की.उन्होंने कहा कि उनके सांसद कभी वेल में नहीं जाते हैं और ऐसा नियम उन्होंने खुद के लिए बनाया है. अटल विहारी वाजपेयी जी ने 2003 में राज्यसभा के 200वें सत्र के दौरान कहा था कहा था, किसी को भी हमारे सेकंड हाउस को सेकंडरी हाउस बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. 

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ है और हमें राष्ट्रीय दृष्टिकोण से ओझल नहीं होना है. हमारे संविधान निर्माताओं ने हम लोगों को जो दायित्व दिया है, हमारी प्राथमिकता है कल्याणकारी राज्य लेकिन उसके साथ हमारी जिम्मेदारी है राज्यों का भी कल्याण। राज्य और केंद्र मिल करके देश को आगे बढ़ा सकते हैं.

हमारे देश में एक लंबा कालखंड ऐसा था जब विपक्ष जैसा कुछ खास नहीं था.  उस समय शासन में बैठे लोगों को इसका बड़ा लाभ भी मिला. लेकिन उस समय भी सदन में ऐसे अनुभवी लोग थे जिन्होंने शासन व्यवस्था में निरंकुशता नहीं आने दी. ये हम सबके लिए स्मरणीय है.  इस सदन का एक और लाभ भी है कि हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना बहुत सरल नहीं होता है, लेकिन देशहित में उनकी उपयोगिता कम नहीं होती है, उनका अनुभव, उनका सामर्थ्य मूल्यवान होता है. 

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि हमारे देश में एक लंबा कालखंड ऐसा था जब विपक्ष जैसा कुछ खास नहीं था. उस समय शासन में बैठे लोगों को इसका बड़ा लाभ भी मिला. लेकिन उस समय भी सदन में ऐसे अनुभवी लोग थे जिन्होंने शासन व्यवस्था में निरंकुशता नहीं आने दी. ये हम सबके लिए स्मरणीय है.

पीएम मोदी ने कहा कि राज्यसभा का फायदा है कि यहां वैज्ञानिक, कलाकार और खिलाड़ी जैसे तमाम व्यक्ति आते हैं जो लोकतांत्रिक तरीके से चुने नहीं जाते हैं. बाबा साहेब इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं. वे लोक सभा के लिए नहीं चुने जा सके लेकिन वे राज्यसभा पहुंचे. बाबा साहेब अंबेडकर के कारण देश को बहुत कुछ प्राप्त हुआ.

पीएम मोदी ने कहा कि राज्यसभा के 250वें सत्र में शामिल होना मेरा सौभाग्य है.संसद भारत की विकास यात्रा का प्रतिबिंब है. 250 सत्र ये अपने आप में समय व्यतीत हुआ ऐसा नहीं है. एक विचार यात्रा रही. समय बदलता गया, परिस्थितियां बदलती गई और इस सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने को ढालने का प्रयास किया. सदन के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में राज्यसभा में योगदान देने वालों का अभिनंदन किया. उसके बाद उन्होंने कहा कि सदन ने बदले हालात में खुद को ढालने की कोशिश की. बोले- मेरे लिए सौभाग्य का विषय है कि इस महत्वपूर्ण अवसर का साक्षी बनना का मुझे मौका मिला है.इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखें है और इतिहास बनाया भी है. इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर इतिहास को मोड़ने में भी सफलता पायी है.

 

 

 



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