शुक्रवार, 17 जनवरी 2020 | 09:16 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
गणतंत्र दिवस पर बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम, जैश के पांच आतंकी गिरफ्तार          एजीआरः टेलीकॉम कंपनियों को एक हफ्ते में चुकाना होगा 1.04 लाख करोड़ रुपये, पुनर्विचार याचिका खारिज          हिमाचल सरकार ने खोला नौकरियों का पिटारा, भरे जाएंगे 2500 पद, पढ़ें कैबिनेट के बड़े फैसले          महेंद्र सिंह धोनी BCCI के सालाना अनुबंध से भी बाहर, इन खिलाड़ियों को किया गया शामिल          जम्मू-कश्मीरः आफत बनकर आया हिमस्खलन, बर्फीले तूफान की चपेट में आने से तीन जवान शहीद, दो लापता          पीओके पर सेनाध्यक्ष की दो टूक- जैसे ही संसद का आदेश मिलेगा, हम उचित कार्रवाई करेंगे          22 जनवरी 2020 को होगी निर्भया के दोषियों को फांसी, डेथ वॉरंट जारी          दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा 70 विधानसभा सीटों पर 8 फरवरी को होंगे चुनाव 11 फरवरी आएंगे नतीजे           सीबीएसई के निर्देश, अब 75 प्रतिशत से कम हाजिरी वाले छात्र नहीं दे पाएंगे परीक्षा          मेरी दिल्ली मेरा सुझाव: भाजपा ने चुनाव घोषणापत्र के लिए लोगों के सुझाव को लेकर अभियान शुरू किया          भारतीय विज्ञान कांग्रेस में बोले पीएम मोदी- प्रयोगशालाओं में प्लास्टिक का विकल्प खोजें          पांच महीने बाद कश्मीर में एसएमएस और सरकारी अस्पतालों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा शुरू          जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास माइन ब्लास्ट, सेना के लेफ्टिनेंट समेत 4 जवान घायल          मनोज मुकुंद नरवाणे बने देश के 28वें सेनाध्यक्ष          CAA के समर्थन में PM मोदी ने शुरू किया ट्विटर कैंपेन,बोले-नहीं जाएगी नागरिकता          देश के पहले CDS होंगे जनरल बिपिन रावत          एशिया XI टीम में हिस्सा नहीं होंगे पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी          विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में हिंसक प्रदर्शनों पर बोले सेना प्रमुख रावत- ये नेतृत्व का काम नहीं          टी-20, वन-डे सीरीज के लिए टीम इंडिया का एलान, रोहित-शमी को आराम, बुमराह-धवन की वापसी          भारतीयों के स्विस खातों, काले धन के बारे में जानकारी देने से वित्त मंत्रालय ने किया इंकार          भाजपा के हाथ से झारखंड भी निकला, अब 16 राज्यों में 42 फीसदी आबादी पर बची एनडीए सरकार          66वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में उत्तराखंड को मिला मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का सम्मान          पीएम की कांग्रेस को खुली चुनौती,अगर साहस है तो ऐलान करें,पाकिस्तान के सभी नागरिकों को देंगे नागरिकता          नागरिकता संशोधन कानून पर जारी विरोध के बीच पीएम मोदी ने लोगों से बांटने वालों से दूर रहने की अपील की है          पाकिस्तान को भारत की नसीहत, अपने यहां अल्पसंख्यकों के हालात पर दें ध्यान          टी-20 रैंकिंग में विराट को पांच स्थान और राहुल को तीन स्थान का फायदा हुआ है। राहुल 734 अंकों के साथ छठे और विराट 685 अंकों के साथ टॉप-10 की लिस्ट में दसवें स्थान पर पहुंच गए हैं          अयोध्या पर सभी पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज,पांच जजों की बेंच ने सुनाया फैसला           निर्भया के दोषी की सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका, कहा- यहां तो हवा से मर रहे, फिर फांसी क्यों          भारतीय सेना को मिले 306 युवा जांबाज अधिकारी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परेड की सलामी          हैदराबाद एनकाउंटर पर CJI का बड़ा बयान,बदले की भावना से किया गया न्याय इंसाफ नहीं          भारतीय संसद का ऐतिहासिक फैसला,सांसदों ने सर्वसम्मति से लिया फैसला,कैंटीन में मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को छोड़ देंगे           60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त करने पर फिलहाल सरकार का कोई विचार नहीं- जितेंद्र सिंह          कोर्ट ने कहा,विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था          मोदी सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली की अवैध कॉलोनियां होगी नियमित          पीओके से आए 5300 कश्मीरियों के लिए मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेंगे साढ़े पांच लाख रुपये          देश के सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर सेविंग अकाउंट की तुलना में दे रहा है डबल ब्याज           पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कबूल किया कि उनका देश कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिशों में नाकाम रहा          संयुक्‍त राष्‍ट्र ने भी माना,जलवायु परिवर्तन से निपटने में अहम है भारत की भूमिका          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार         
होम | विचार | आखिर क्यों राजनीति की बलि चढ़ते जा रहे हैं गांव ?

आखिर क्यों राजनीति की बलि चढ़ते जा रहे हैं गांव ?


आखिर क्यों राजनीति की बलि चड़ते जा रहे है गांव ?

श्रवण सेमवाल 

पहाड़ों की दिलकश चोटियां और खुबसूरत वादियां भले ही सैलानियों को किसी स्वर्ग सरीखा एहसास कराती हों लेकिन कुदरत के इन खूबसूरत नजारों के बीच रोजमर्रा की जिंदगी इतनी मुश्किल है कि यहां के लोग किसी भी तरह वहां से बाहर निकलने की राह तलाशते ही नजर आते हैं। पहाड़ों के बारे में एक कहावत मशहूर है कि पहाड़ का पानी और की जवानी कभी वहां के काम नहीं आती। रोजगार को लेकर रोटी की डूढ़ में मौकों को तरासती आज की पीढ़ी के लिए, शिक्षा की समुचित व्यवस्था का अभाव और खेती में आने वाली मुश्किलों ने हमेशा से यहां के लोगों को अपनी जड़ों को छोडऩे के लिए मजबूर किया है। उत्तराखंड में पलायन अब इस हद तक पहुंच गया है कि यहां के गांव तेजी से वीरान होते जा रहे हैं। सरकार ने भी माना है कि पहाड़ों में गैर आबाद गांवों की संख्या 1,059 तक पहुंच गई है। गैर आबाद गांवों का मतलब है ऐसे गांव जहां अब कोई भी नहीं बचा है, भले ही गांव के पलायन को लेकर सरकार अपनी योजनाओं का कितना ही डिढोरा क्यों ने पीट ले पर सच्चाई यह है कि उत्तराखंड के गांव पलायन के कारण आज खंडहर बन चुके है। सच्चाई यह भी है कि जो लोग गांव में रह रहे है वह वे लोग है जो मजदूरी की बेबस पीढ़ा को सहते हुए इस आस में रूके है कि कभी तो सरकार को उन पर तरस आएगा। तभी तो वीरान पड़ी वह घाटिया सरकार को एहसास कराऐगी कि उत्तराखंड गांव का प्रदेश है शहरो का नही। पलायन से सूनी पड़ी उस मां की आश आज भी के बेटे का वह बचपन कराती है कि बेटे के वह शब्द की मां मैं गांव के लिए काम करूगा और गांव के लिए मरूगा। लेकिन यह क्या अलग राज्य के बाद तो पहाड़ के गांव पलायन से पिघल गये। युवा सरकार के सामने बेराजगारी के गीत गाता रहा औऱ सरकार पक्ष-विपक्ष की राजनीति में अपनी योजनाएं गिनाता रहा जब युवा की किसी ने नही सुनी तो उसने पहाड़ ही नही देश से ही पलायन करन में अपनी भलाई समझी । आकड़े बताते है कि विदेशों में सबसे ज्यादा होटलो में उत्तराखंड का युवा काम करता है। जहां तक पलायन की बात है, साल 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद गांवों से पलायन में और तेजी आई है, 2001 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य के 75 प्रतिशत गांव पलायन की वजह से खाली होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। जनसंख्या के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2001 से 2011 के बीच उत्तराखंड की आबादी 19.17 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह वृद्धि सिर्फ 11.34 प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्रों में 41.86 प्रतिशत रही। यह आकंड़ा राज्य बनने के तुरंत बाद का है लेकिन आज तो पलायन ने और भी भयानक रुप ले लिया है। युवाओं का पलायन बढ़ जाने से राज्य के पहाड़ी जिलों का निर्भरता अनुपात 1:1.34 हो गया है. इसका अर्थ है कि गांवों में सौ युवाओं के मुकाबले 134 वृद्ध हैं। आज भी गांव में परिवहन, पेयजल, बिजली, शिक्षा,और  चिकित्सा  गांव में नही पहुच पायी है। तकनीकी के इस दौर में भी गांव के बीमार व्यक्ति को इंटरपास क्लीनीकर से संतुष्ट होना पड़ रहा है और वह भी तब जब देश की मोदी सरकार गांव, किसान के साथ डिजिटल भारत की बात करते है।   आज भी उत्तराखंड में 5,000 से ज्यादा गांव सड़कों से जुड़ नहीं पाए हैं। राज्य की सरकार कहती है कि हमारी सरकार गांव के विकास के लिए तत्पर है। अगर गांवो का विकास हो रहा है तो प्रदेश की यह दहकती तस्वीर कैसी । उत्तराखंड की क्षैत्रीय पार्टी ते नेता काशी सिंह ऐरी कहते हैं, ''राज्य के गठन के बाद से लगभग 20 लाख लोग राज्य से पलायन कर चुके हैं। यह हालत तब थी जब 2013 की आपदा नहीं आई थी आपदा के बाद तो पलायन और अधिक बढ़ा है. इसी मसले पर बीजेपी नेता मुन्ना सिंह चौहान कहते हैं, 'कि 'यूपी से अलग होने के डेढ़ दशक बाद भी हम अपने विकास का खाका ही नहीं खींच सके, ऐसे में युवा पलायन नहीं करेगा तो क्या करेगा?  उसे न रोजगार मिल रहा है और न संसाधनों में हिस्सा. युवाओं की कोई जरूरत पूरी नहीं हो रही है यही कारण है कि पहाड़ का पानी और जवानी वहां के काम नही आ रही है। पलायन से पहाड़ का सिर्फ सामाजिक संतुलन ही नहीं, राजनैतिक संतुलन भी गड़बड़ा गया है। 2001 की जनगणना के आधार पर 2006 में हुए राज्य परिसीमन के तहत पहाड़ की 40 विधानसभा सीटों में से 6 सीटें जनसंख्या की कमी के चलते काट दी गईं, और यह 6 सीटें मैदानी क्षेत्र में बढ़ा दी गईं। इस तरह अब पहाड़ में सिर्फ 34 सीटें रह गईं और मैदान में 36 सीटें हो चुकी हैं, जबकि देखा जाए तो 9 जिले पहाड़ में आते हैं कुल चार जिले ही मैदान के लिए परिसीमित थे। 



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: