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किरण नेगी को इंसाफ कब मिलेगा ?


-उत्तराखण्ड मूल की रहने वाली किरण नेगी की गैंग रेप के बाद निर्भया की तरह हत्या की गई थी। किरण एक ऑफिस जाने वाली सपने देखने वाली मिडिल क्लास लड़की थी। उसके पिता सेक्योरिटी गार्ड थे।
-9 फरवरी 2012 को उत्तराखण्ड की बेटी किरण नेगी का दिल्ली के नजफगढ़ से अपहरण
-गुड़गांव में एक लाल इंडिका में उसका अपहरण कर लिया गया।
-अपहरण करके हरियाणा के गांव में ले गए और तीन दिन तक गैंगरेप किया गया। सबूत मिटाने के मकसद से उसकी आंखों और कई अंगों पर तेजाब डाला गया। 
-उसके नाजुक अंगो में शराब की बोतल डाल दी हो, आँखों को तेजाब से जला दिया हो, जिसका शरीर खौलते पानी से दागा गया हो..
उसकी हालत ये थी कि पोस्टमॉर्टन करने वाला डॉक्टर भी देखकर बेहोश हो गया था।
-रूह कंपा देने वाले इस कांड के बारे में मुख्य धारा के मीडिया में सही तरीके से जानकारी नही आ पाई।
-साल 2014 में उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि तीनों दोषियों को फाँसी की सजा दी जाए। लेकिन बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँच कर लटक गया।
-कोरोना के कारण पिछले दो साल ऐसे ही बर्बाद हो गए। परिवार को तो अब ये भी नहीं पता कि अगली तारीख कब है। वो अपने वकील का नाम तक सही से नहीं जानते। बस इस उम्मीद में रहते हैं कि उनके जीते-जी दरिंदों को फांसी हो जाए।
-इसलिए अब हम मांग करते हैं कि ये मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए निपटाया जाए। 
-किरण की मौत मीडिया की सुर्खियां नहीं बनीं, पिता जब इंसाफ मांगने उस समय की दिल्ली की मुख्यमंत्री के पास गए थे तो ये कहकर टरका दिया गया था कि ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, न्याय के नाम पर अधिकारियों ने एक लाख का चैक पकड़ा दिया
-किरण नेगी की मौत पर आक्रोश नहीं फूटा था। वो मीडिया की सुर्खियां नहीं बनीं थी। उसके चले जाने के बाद बहसें नहीं हुई थीं, कानून नहीं बदले गए थे। कोई नेता उसके घर नहीं गया था।

 



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