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दुनिया | रेस्टोरेंट में वेटर की जगह रोबोट अगर आपको खाना देने शुरू कर दें तो क्या कहेंगे?
रेस्टोरेंट में वेटर की जगह रोबोट अगर आपको खाना देने शुरू कर दें तो क्या कहेंगे?
क्या आप मोबाइल की एक और तकनीकी क्रांति के लिए तैयार हैं। कल्पना करिए आपने मोबाइल पर मूवी डाउनलोड करना शुरू किया और तीन सेकेंड बाद ही मूवी देखना शुरू कर दें। जिस तरह आप वर्क फ्रॉम होम करते हैं, वैसे ही वर्क फ्रॉम एनीवेयर करना शुरु करें, यानी घर, जंगल, पहाड़ हर जगह नेटवर्क मिल रहा । दिल्ली से शिमला के सफर के दौरान लैपटॉप पर ऑफिस का काम करते हुए जा रहे हैं और फिर शाम की कॉफी मॉल रोड पर पी रहे हैं। बिना किसी रुकावट के दुनिया के किसी भी कोने में वीडियो कॉल, बिना चीरफाड़ के सर्जरी हो जाए, आपको डॉक्टर से सलाह लेने के लिए क्लीनिक जाने की ज़रूरत ही खत्म हो जाए, ड्रोन की मदद से ऑनलाइन सामान मिनटों में पहुंच जाए, किसान मोबाइल के दो बटन दबाकर अपना कोई भी उपकरण चलाने लग जाएं, रेस्टोरेंट में वेटर की जगह रोबोट आपको सर्व करने आएं और वे आपस में एक दूसरे से बात भी करें- - जी हां, ये सब 2023 में आपको देखने को मिल सकता है।
हम सभी मोबाइल और इंटरनेट की ताकत को जानते और समझते हैं। आज हम अपने स्मार्टफोन के ज़रिए वे सभी काम कर पाते हैं, जिसके लिए कंप्यूटर की जरूरत होती है। ये संभव हो पाया है 4 जी तकनीक आने के बाद से। यहां जी का मतलब- जेनरेशन से है यानी 4 जी मतलब चौथी जनरेशन। इससे पहले 3 जी जमाने में केवल फोन से केवल कॉल और एसएमएस का ही इस्तेमाल हो पाता था। उससे पहले 2 जी और सबसे पहले 1 जी तकनीक का इस्तेमाल हो चुका है। और अब हम 5 जी तकनीक इस्तेमाल करने के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं।
टेलीकॉम मिनिस्टर अश्वनी वैष्णव ने आईआईटी मद्रास में 20 मई को देश की पहले 5G ऑडियो और वीडियो कॉल की सफलतापूर्वक टेस्टिंग करके दिखा दी। इससे पहले 17 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले 5G टेस्टबेड का उद्घाटन करके कारोबारियों को बड़ा तोहफा दिया था। इन डेवलपमेंट्स के बाद माना जा रहा है कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस इसी हफ्ते 5G स्पेक्ट्रम ऑक्शन प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास ले जा सकता है।
साल के अंत तक साल के अंत तक इंटरनेट प्रवाइडर्स कंपनियों जैसे रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन 5 जी सर्विस लेकर मार्केट में उतर जाएंगी। अगले साल यानी 2023 की शुरुआत में 5 जी की सर्विस आम लोगों के मोबाइल में पहुंच जाएगी। कंपनियों ने अपने ट्रायल्स भी कर लिए हैं। हाल ही में एयरटेल ने कपिल देव के होलोग्राम को शो करके साबित कर दिया था, वह 5 जी के लिए तैयार है। 5जी टेक्नोलॉजी टेस्टिंग के दौरान हैदराबाद में 1 जीबी फाइल केवल 30 सेंकेंड में डाउनलोड हो गई. हाल ही में एयरटेल ने नोकिया के साथ मिलकर कोलकाता शहर के बाहर 700 मेगा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड में पहली 5जी ट्रायल को सफल अंजाम दिया. भारत में गांवो में किया जाने वाला ये पहला 5जी ट्रायल था.
अब सवाल उठता है कि 5 जी आने के बाद क्या बदलाव आएंगे। तो इसका सीधा उत्तर है कि तकनीक के स्तर पर बहुत बड़े बदलाव आएंगे। आपने 4 जी में जो तकनीकी क्रांति महसूस की, उससे 10 गुणा ज़्यादा तकनीकी क्रांति देश में हो सकेगी। 5 जी की पीक स्पीड 20 जीबी पर सेंकेंड होगी ।
जैसे- 5 जी तकनीक से बहुत सारी मेडिकल सर्जरी आसानी से हो सकेंगी। अमेजन या फ्लिपकार्ट आपके सामान को ड्रोन के ज़रिए मिनटों में पहुंचा सकेंगी, ऑनलाइन शिक्षा संस्थानों का विस्तार होगा, ई-मेडिसिन और ई-खेती से किसानों को खेती में बड़ा लाभ मिलेगा, कोई मूवी केवल 3 सेकेंड में डाउनलोड हो जाएगी, बहुत सारे काम रोबोट करने लग जाएंगे। कुल मिलाकर डिजिटल क्रांति की असली शुरुआत होगी। और इस दशक के अंत तक यानी 2030 तक 6 जी के आ जाने की उम्मीद है। उसके बाद तो और भी क्रांतिकारी बदलाव होंगे।
एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 5जी से 2035 तक भारत में एक लाख करोड़ डॉलर का
कारोबार बढ़ जाएगा। एरिक्शन की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 2026 तक दुनिया भर में
3.5 अरब 5जी कनेक्शन होंगे, जबकि भारत में इनकी संख्या 35 करोड़ तक पहुंच जाएगी.
-अब सवाल उठता है कि ये सब बदलाव तो होंगे, लेकिन इतने ही सस्ते होंगे,जैसे आज की 4 जी सर्विस है। यानी बिल कितने का बढ़ेगा, तो इसका जवाब है कि बहुत ज़्यादा। ऐसा भी हो सकता है कि आम आदमी शुरुआत में इसे अफोर्ट ही न कर पाए। इसका कारण ये है कि 5 जी के लिए कंपनियों को नई मशीनों और तकनीक पर बड़ा निवेश करना पड़ेगा, जिसकी भरपाई वो आम ग्राहकों से ही करना चाहेंगी और ऐसे में आम आदमी इससे दूर ही रहेगा। टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद कई डिवाइस इसके बैंडविथ को सपोर्ट नहीं करते ऐसे में बहुत सारे डिवाइस को बदलना होगा जिससे उनको भी बहुत सारा नुकसान होने की आशंका है।
वैसे तो कुछ रिपोर्ट बता रहे हैं कि हाई क्वालिटी वाले 4G फोन में ही 5जी इंटरनेट चला सकेंगे लेकिन बहुत सारे लोगों को अपना फोन बदलकर 5 जी फोन भी लेना पड़ेगा, जिससे काफी बेवजह का खर्च बढ़ेगा। 5G में इस्तेमाल होने वाली मिलीमीटर-वेव उसके रास्ते में आने वाले रुकावटों जैसे पेड़ों के द्वारा या बारिश की वजह से अवशोषित भी हो सकता है। जो एक बड़ी चुनौती है। तो कुल मिलाकर चुनौतियां हैं, लेकिन उम्मीद है धीरे धीरे उनसे पार भी पा लिया जाएगा। बाकी आप 5 जी से मिलने वाले फायदों के बारे में सोचिए और अगर कारोबार के किसी नए आइडियाज पर काम करना जारी रखें, हो सकता आप ही कोई नया स्टार्टअप कर पाने में कामयाब हो जाएं। तो हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
नवीन पाण्डेय की रिपोर्ट