रविवार, 7 जून 2020 | 12:02 IST
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उत्तराखंड पहुंचे उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू,कहा वीरों की धरती पर आकर धन्य हो गया हूं


उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू आज रुड़की और देहरादून में कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पहले वह रुड़की में शहीद राजा विजय सिंह स्मारक एवं कन्या शिक्षा प्रसार समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे। इसके बाद उपराष्ट्रपति ने देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। 

आज सुबह साढ़े नौ बजे उपराष्ट्रपति जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। जहां राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय  मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत और डीजीपी अनिल रतूड़ी ने एयरपोर्ट पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का स्वागत किया। इसके बाद उपराष्ट्रपति यहां से हेलीकॉप्टर द्वारा रुड़की के लिए रवाना हो गए।

सुबह 10: 16 मिनट पर उपराष्ट्रपति कुंजा बहादरपुर गांव पहुंचे। जिसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राजा विजय सिंह ने देश की आजादी में अंग्रेजों के खिलाफ सेना बनाई और लड़ाई लड़ी। ग्रामीणों ने आजादी में अपना बलिदान दिया। उनके इस बलिदान को देश कभी भुला नहीं सकता है। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि भारत के वीरों ने अंग्रेजों को परास्त किया। राजा विजय सिंह ने देश की रक्षा और आजादी के लिए अपने प्राण दिए। उत्तराखंड की भूमि वीरों की भूमि है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि मैं आज वीरों की धरती पर आकर धन्य हो गया हूं। मैंने जब इस गांव की वीरगाथा सुनी तो यहां आने का मन बना लिया था। 1824 में राजा वीर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए उनसे मुकाबला किया और बलिदान दिया। ग्रामीणों ने भी उनका साथ दिया और बलिदान दिया। राजा वीर सिंह ने उस समय ही आजादी की घोषणा कर दी थी।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि राजा वीर सिंह ने अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब दिया, मैं ऐसे वीरों को नमन करता हूं। अंग्रेजों ने वीर सिंह और ग्रामीणों को एक पेड़ पर लटका दिया था। यह हमारा सौभाग्य है कि हमें ऐसे वीर मिले। उनके बिना हमारा इतिहास अधूरा है। कुंजा बहादरपुर ने देश में पहली बार आजादी का बिगुल फूंका था। उत्तराखंड में कई वीरों ने देश की आजादी में अपना सहयोग दिया है,।

 

उत्तराखंड वीरों की भूमि है। हमेशा इस भूमि ने देश के लिए बलिदान दिया है। उत्तराखंड सरकार कुंजा बहादुर पुर और राजा विजय सिंह के इतिहास को प्रदेश के स्कूलों और कॉलेज में पाठ्यक्रम में शामिल करें। इस पर उत्तराखंड सरकार को मंथन करना चाहिए। 12वीं कक्षा तक अपनी मातृभाषा का ज्ञान जरूरी होना चाहिए। अंग्रेजी भाषा आनी चाहिए, लेकिन मातृभाषा जरूरी आनी चाहिए।

आज देश बदल रहा है। आज खाने का ट्रेंड भी बदल गया है। लोग फास्टफूड अधिक खा रहे हैं। मगर भारतीय खाना अब लोग भूल गए हैं। हमें अपने पारंपरिक खाने को नहीं भूलना चाहिए। हमें अपने भारतीय और पारंपिरक खाने को नहीं भूलना चाहिए। हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। महिलाओं को सम्मान देना चाहिए। बच्चों को शिक्षित करना चाहिए। आज मुझे इस समारोह में आमंत्रित करके मख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और केंद्रीय मानव संधासन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सम्मान दिया है। मैं खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा हूं। मैं देश में अब जहां भी जाऊंगा। इस कुंजा बहादरपुर गांव और राजा विजय सिंह की बहादुरी और बलिदान को बताऊंगा। 
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज सरकार ने जम्मू कश्मीर में केन्द्र शासन लागू किया है। उससे वहां रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। अयोध्या पर जो फैसला आया है। उसका लोगों ने सम्मान किया है। देश के लोगों ने एकता दिखाई है। देश के लिए एकता जरूरी है। इतना कहकर उपराष्ट्रपति ने अपना संबोधन समाप्त किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति को गंगाजल भेंट किया और इसके बाद उपराष्ट्रपति मंच से उतरे और लोगों से मिले। लोगों से मिलने के बाद वह गांव कुंजा बहादरपुर से वापस रवाना हो गए।

इसके बाद दोपहर तीन बजे उपराष्ट्रपति देहरादून स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज के दीक्षांत समारोह में पहुंचे। विवि के 17वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावतद भी समारोह में मौजूद रहे। 

समारोह में 13 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल से नवाजा गया। आज कुल 80 कोर्स के 3741 स्टूडेंट्स को डिग्री दी गई। इसमें 29 पीएचडी, 1215 ग्रेजुएट और 2497 पोस्ट ग्रेजुएट शामिल हैं। कुल 85 को मेडल और ट्रॉफी दी गई।



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