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बढ़ाने की बजाय धामी सरकार ने स्कूलों की फीस घटा कैसे दी ?


उत्तराखण्ड के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को धामी सरकार ने बड़ी राहत दे दी है। लंबे समय से फीस बढ़ाने की मांग कर रहे प्राइवेट स्कूल इससे नाराज होकर कोर्ट जाने का दावा कर रहे हैं। दरअसल धामी सरकार ने एक ऐसा फॉर्मूला निकाला, जिससे बढ़ने की बजाय घट गई है।

उत्तराखंड में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 90 हजार छात्र-छात्राओं की फीस के लिए विभाग ने नया फॉर्मूला तैयार किया है। इसमें हर महीने अधिकतम 1893 रुपये फीस तय की गई है। नया फॉर्मूला न बनता तो यह फीस 4200 रुपये होती।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 3900 प्राइवेट स्कूलों में कोटे की 25 प्रतिशत सीटों पर 90 हजार छात्र-छात्राएं हैं। आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूल कई वर्षों से फीस बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। प्राइवेट स्कूल इस मसले को लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचे। इसके बाद विभाग ने कई राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन किया। विभाग ने आरटीई नियमावली 2011 के अनुसार फीस तय की तो पता चला कि फीस 4200 रुपये बन रही है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की घटती संख्या और शिक्षकों के बढ़ते वेतन की वजह से इतनी फीस बन रही थी।

इससे सरकार पर बहुत अधिक वित्तीय भार पड़ रहा था। इस दौरान यह भी देखा गया कि आरटीई के तहत कौन से प्राइवेट स्कूल सबसे कम और सबसे अधिक फीस ले रहे हैं। इसके हिसाब से औसत फीस निकाली गई। इससे भी बात नहीं बनी तो विभाग ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर नया फॉर्मूला तय कर 1893 रुपये फीस तय की। 

पहले ऐसे तय हुई थी फीस  

एक से आठवीं तक के सरकारी और अशासकीय स्कूलों में वर्ष 2012 में 9 लाख 88 हजार से अधिक बच्चे थे। इन बच्चों की पढ़ाई पर हर साल 16 अरब 39 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आ रहा था। कुल खर्च को कुल बच्चों की संख्या से भाग देने पर 16595 रुपये आए। इसे 12 से भाग देने पर 1383 का आंकड़ा सामने आया। इसी हिसाब से नई फीस तय की गई।

इसलिए हुआ नियमावली में संशोधन

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आरटीई की 2011 की नियमावली में फरवरी 2021 में संशोधन किया गया था। यदि यह संशोधन न किया जाता तो पुरानी नियमावली से प्राइवेट स्कूलों को हर महीने 4200 रुपये फीस देनी पड़ रही थी।

हर साल खर्च होंगे करीब डेढ़ अरब 

प्राइवेट स्कूलों में आरटीई कोटे के बच्चों की फीस (प्रतिपूर्ति) पर वर्तमान में एक अरब 15 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन अब हर साल लगभग डेढ़ अरब खर्च होंगे। इसमें 90 प्रतिशत भागीदारी केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य की होगी। 

विद्या मंदिर रतूड़ा में सबसे कम फीस 

प्रदेश में आरटीई कोटे के बच्चों की सबसे कम फीस सरस्वती विद्या मंदिर रतूड़ा रुद्रप्रयाग में 140 रुपये है। जबकि दिल्ली पब्लिक स्कूल हल्द्वानी की ओर से सबसे अधिक 2600 रुपये फीस की मांग की जा रही है। विभाग के सर्वे में यह बात सामने आई।     
शिक्षा निदेशक वंशीधर तिवारी ने कहा है कि प्राइवेट स्कूल पिछले काफी समय से फीस बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए 1893 रुपये फीस तय की गई है।
उधर स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि हम बहुत कम फीस पर आरटीई कोटे के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अब जो फीस तय हुई है इस पर अन्य स्कूलों से बात करने के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाएंगे।

 

 



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