बुधवार, 20 नवंबर 2019 | 11:47 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
स्वर कोकिला लता मंगेशकर की हालत नाजुक, देश भर दुआओं का दौर जारी           महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश, मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी          अयोध्या में ही मस्जिद निर्माण के लिए दी जाएगी जमीन          सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर रामलला का हक माना          कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व विभाग की खोज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता          कोर्ट ने कहा,विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था          कोर्ट के फैसले में ASI का हवाला देते हुए कहा गया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण किसी खाली जगह पर नहीं किया गया था          अयोध्या पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बनेगा राम मंदिर, मस्जिद के लिए अलग जगह          मोदी सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली की अवैध कॉलोनियां होगी नियमित          पीओके से आए 5300 कश्मीरियों के लिए मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेंगे साढ़े पांच लाख रुपये          केंद्र सरकार ने 48 लाख कर्मचारियों को दिवाली से पहले दिया बड़ा तोहफा, 5 फीसदी बढ़ाया महंगाई भत्ता           देश के सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर सेविंग अकाउंट की तुलना में दे रहा है डबल ब्याज           पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कबूल किया कि उनका देश कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिशों में नाकाम रहा          संयुक्‍त राष्‍ट्र ने भी माना,जलवायु परिवर्तन से निपटने में अहम है भारत की भूमिका          महाराष्ट्र, हरियाणा में 21 अक्टूबर को होगा विधानसभा चुनाव, 24 को आएंगे नतीजे          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार         
होम | धर्म-अध्यात्म | देश के अंतिम गांव माणा की जेठ पुजाई

देश के अंतिम गांव माणा की जेठ पुजाई


  उत्तराखंड अपनी संस्कृति के लिए मशहूर हैं और अपने मेलों के लिए प्रसिद्ध है| राज्य में वर्ष भर मेलों में बहार रहती है| मेले सामाजिक मेल मिलाप का केंद्र होते हैं और हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा भी हैं। इसी लिए उत्तराखंड को मेलों ,संस्कृति और विचारों का  मिलन स्थल माना जाता  है। ऐसी ही एक मेला इन दिनों देश के अंतिम गांव माणा में चल रहा है। आज हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों मनाया जाता हैं जेठ पुजाई मेला।

देश के अंतिम गांव माणा में आयोजित हुई जेठ पुजाई मेले में स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश के यात्रियों ने भी भगवान घंटाकर्ण के दर्शन किए और भगवान घंटाकर्ण से देश में सुख-शांति-सतुष्टि के लिए प्रार्थना की। आइए हम आपको बताते हैं कि जेठ पुजाई क्या है।

सीमांत गांव माणा में पौराणिक परंपरा अनुसार प्रतिवर्ष जेठ पुजाई धार्मिक उत्सव का आयोजन होता है। जेष्ठ मास की संक्राति को भगवान घंटाकर्ण अपने शीतकालीन प्रवास स्थल से मेल मंदिर मे पहुंचते है। इस दिन पूरे दिन विशेष पूजाओं का अयोजन होता है। इस प्रकार की पूजाएं 15 जून से 15 नवम्बर तक चलती है। इसके बाद 15 नवबर को पूरे विधि-विधान व धार्मिक परंपराओ के साथ भगवान घंटाकर्ण पुनः अपने शीतकालीन प्रवास पर विराजमान हो जाते है। भगवान घंटाकर्ण के अपने मूल मंदिर में प्रवेश उत्सव को ही जेठ पुजाई कहा जाता है। 
जेठ पुजाई धार्मिक उत्सव को मेले का स्वरूप देने की शुरूआत वर्ष 2014 में हुई थी। वर्ष 2013 केदार आपदा के बाद तीर्थ यात्रियों व सैलानियों की संख्या भी कम होती गई। देश के अंतिम गांव में रौनक पहले जैसे बन पाए। इसके लिए माणा गांव के जागरूक नागरिको के साथ ही माणा गांव के देश-विदेश में उच्च पदों पर सेवानृवित वासियों ने इस धार्मिक उत्सव को मेले का स्वरूप देने का फैसला किया,और वर्ष 2014 में इसकी शुरूआत की गई।

जिसके बाद जेठ पुजाई उत्सव को तीन दिन के मेले का स्वरूप दिया गया। इस पुजाई में उत्तराखंड के नामी कलाकारों को आंमत्रित कर मेले के माध्यम से आपदा से उबरने का सफल प्रयास किया गया। 
 



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: