बुधवार, 23 जून 2021 | 10:17 IST
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उत्तराखंड से गायब हो गया काफल फल


काफ़ल शब्द आते ही देश दुनिया में उत्तराखण्ड देवभूमि को पहचान दिलाता है। साहित्य जगत में काफल पर बहुत किताबे भी लिखी गयी। काफ़ल पर बहुत लोक गीत भी लिखे गए। काफ़ल पर एक लोक गाथा मां बेटी का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है। जो आज भी पक्षी की रूप में प्रचलित है। लेकिन इस बार पहाड़ के जंगलों में मई आखिरी एवं जून के प्रथम में पहाड़ के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाला रसीला फल काफ़ल पहली बार नजर नहीं आ रहा है। पहली बार देखने को मिला जंगलों में एक दाना काफ़ल नही है। अधिकतर प्रवासी गांव में काफ़ल खाने ही आते थे काफ़ल कई बीमारियों का औषदियों का काम भी करता है। काफ़ल पशु पक्षियों का आहार के साथ साथ बेरोजगार युवाओं को रोजगार का साधन भी होता था। गर्मियी की छुट्टियों में युवक काफ़ल तोड़कर बाजारों में बेचते थे। आपने अक़्सर देखा होगा गुमखाल,पौड़ी श्रीनगर,कस्बो में मई जून में आसानी से काफ़ल बेचने वाले मिल जाते थे। लेकिन इस बार हमारे संवाददाता जगमोहन डांगी ने पूरा जंगलो में गए लेकिन उन्हें कहीं भी एक दाना नही दिखा।



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