रविवार, 21 जुलाई 2019 | 08:44 IST
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उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर तेजी से फैल रहा है नशे का करोबार


हिमालय का प्रवेश द्वार, ऋषिकेश और हरिद्वार जहाँ पहुँचकर गंगा पर्वतमालाओं को पीछे छोड़ समतल धरातल की तरफ आगे बढ़ जाती है। हरिद्वार-ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है। हरिद्वार-ऋषिकेश भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हिमालय की निचली पहाड़ियों और प्राकृतिक सुन्दरता से घिरे इन धार्मिक स्थानों से बहती गंगा नदी इन दोनों धार्मिक स्थानों को अतुल्य बनाती है। हरिद्वार-ऋषिकेश को केदारनाथबद्रीनाथगंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है। कहा जाता है कि इन स्थान पर ध्यान लगाने से मोक्ष प्राप्त होता है। हर साल यहाँ के आश्रमों के बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शान्ति के लिए आते हैं। विदेशी पर्यटक भी यहाँ आध्यात्मिक सुख की चाह में नियमित रूप से आते रहते हैं।

 

हरिद्वार-ऋषिकेश को धर्म नगरी के नाम से भी जाना जाता है लेकिन इन दिनों इन धार्मिक स्थानों में गंगा नदी के घाटों और गंगा के किनारे बाहर से पहुंचने वाले पर्यटकों और कुछ असामाजिक तत्वों द्वार बड़े स्तर पर नशे का कारोबार पैर पसारता जा रहा है। जहां नजर डालेंगे वहा नशे का सेवन करते लोग आसानी से देखे जा सकते हैं

यह दोनों ही तीर्थनगरी अब धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में आ रही है। जिसका प्रभाव सबसे ज्यादा यहां के युवाओं पर पड़ रहा है। ऋषिकेश का त्रिवेणीघाट इलाका नशे का गढ़ बन रहा है। गांजा और चरस की भूमिका इसमें सबसे ज्यादा है। इस ओर पुलिस की कार्रवाई भी संतोषजनक नहीं दिख रही है।

ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। जहां से लेकर लक्ष्मण झूला तक नशे का व्यापार रफ्तार पकड़ता है। शाम को गंगा घाट पर नशे की हालत में युवाओं का दिखना आम बात हो गई है। बाहर से आए पर्यटक खुलेआम नशे की धुन में इन तीर्थ स्थलों में घूमते हुए देख जा सकते है।

हरिद्वार-ऋषिकेश घूमने वाले बाहरी लोगों में अधिकतर युवा अपने साथ धड़ले से नशे का सामना लेकर आ रहे है। जिसके बाद यह लोग गंगा घटों और गंगा के साथ जल क्रिड़ा करते हुए नशे का सेवन करते हुए अक्सर देखे जा सकते है। जिससे साफ जाहिर हो रहा हैं कि यहां के घाटों का प्रयोग मां गंगा की पूजा से ज्यादा लोगों द्वारा छुपकर नशा करने के लिए किया जाता है।

इस बारे में जब हमने पुलिस-प्रशासन से बात करने की कोशिश की तो उनका कहना हैं कि ऐसे तत्वों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। बाहर से आने वाले पर्यटकों के वहनों को चैक किया जा हैं,और जिस किसी भी पर्यटक के पास नशे का सामान पाया जाता है। उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होती है।

इसके बावजूद भी उत्तराखंड के इन धार्मिक स्थानों पर निरंतर नशे के सौदागर अपने पांव पसार रहे है। जरूर इस बात की हैं कि इन नशे के सौदागरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और इन्हें इन धार्मिक स्थानों पर घूसने ही नहीं दिया जाए।



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