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उत्तराखण्ड में अब इमारतों के अवैध निर्माण पर नहीं होगी सजा, धामी कैबिनेट ने 18 प्रस्ताव पास किए


देहरादून । उत्तराखण्ड में मकानों के अवैध निर्माण करने पर सज़ा की जगह भारी जुर्माना लगाया गया है। यानी अब सज़ा नहीं होगी। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके लिए संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गई है। प्रदेश की जेलों में आजीवन सजा काट रहे बंदियों को अब 14 साल में ही रिहाई मिल जाएगी। राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में 19 प्रस्तावों पर चर्चा हुई जिसमें 18 पर मुहर लगी। एक प्रस्ताव टाल दिया गया। 

बैठक में 18 प्रस्ताव आए जिन सभी पर कैबिनेट की मुहर लग गई। कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए आजीवन कारावास की अवधि 14 साल कर दी है। पहले महिला को 14 से 16 और पुरुष की 16 से 18 के बीच की अवधि थी। इसके बाद इन्हें छोड़ा जाता था। अब 14 साल की कैद के बाद इन्हें भी छोड़ा जा सकता है। इसके अलावा एक राहत की बात ये है कि पहले केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी को कैदियों को छोड़ा जाता था, लेकिन अब कैदियों को कभी भी छोड़ा जा सकेगा वहीं, बैठक में आगामी विधानसभा सत्र के दौरान पेश होने वाले अनुपूरक बजट का भी प्रस्ताव लाया गया। जिस पर तय हुआ कि सत्र में इस साल 4867 करोड़ का अनुपूरक बजट लाया जाएगा।

अब पढ़िए बिन्दु बार फैसले- कैबिनेट ने 4867 करोड़ रूपये के अनुपूरक बजट को मंजूरी दी।

– राज्य कैबिनेट ने फैसला करते हुए उम्र कैद की सजा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इसमें अब कैदी को कभी भी छोड़ा जा सकता है। पहले 26 जनवरी और 15 अगस्त को होती थी सजा माफ

 

– इसमें महिला और पुरुष की सजा अहर्ता को एक कर दिया गया। पहले महिला कैदी को 14 से 16 साल की सजा पूरी करने के बाद छोड़ा जाता था और पुरुष कैदी को 16 से 18 साल की सजा पूरी करने के बाद छोडा जाता था। लेकिन अब पुरुष भी 14 से 16 साल की सजा पूरी करने के बाद जोड़े जा सकेंगे।

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