मंगलवार, 24 मई 2022 | 01:35 IST
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भारत में मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की असली वजह आपके होश उड़ा देगी...


क्या भारत में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है?  देश में गूगल से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में यह भी शामिल है। लोगों में भारतीय मुस्लिमों के जन्म दर को लेकर काफी उत्सुकता पाई जाती है। सच भी है कि दशकों से मुसलमानों का जन्म दर बाकी सबसे ज्यादा है। ताजा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण  में पता चला है कि प्रत्येक मुस्लिम महिला अपने जीवन में औसतन 2.36 बच्चों को जन्म देती है जो 1.99 के राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। वहीं, हिंदुओं की बात की जाए तो इसका जन्म दर 1.94 के साथ राष्ट्रीय औसत से नीचे है। हालांकि, आंकड़ों पर गौर करेंगे तो पता चलता है कि मुसलमानों में औसत जन्म दर का ऊंचा होना सिर्फ और सिर्फ धर्म का मसला नहीं है बल्कि इसके पीछे और भी कई कारण हैं- मसलन, गरीबी और अशिक्षा। यही कारण है कि मुस्लिम तबका भी शिक्षा और समृद्धि के पैमाने पर ज्यों-ज्यों देश के दूसरे धर्मों से कदमताल मिला रहा है त्यों-त्यों उनमें भी जन्म दर तेजी से घट रहा है।

 

 

 

आंकड़े बताते हैं कि समृद्धि आती है तो जन्म दर घटता है। लेकिन एक सच ये भी है कि, मुस्लिम जन्म दर बाकी सभी धर्मों के मुकाबले सबसे तेजी से घट रहा है। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच शिक्षा और समृद्धि का फासला भी कम हो रहा है। 1992 में किए गए पहले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में मुस्लिम जन्म दर 4.41 था जबकि हिंदू जन्म दर 3.3 यानी दोनों के बीच 1 पॉइंट का बड़ा अंतर। 30 साल बाद अब यह अंतर घटकर आधे से भी कम पॉइंट का रह गया है।

 

यह कहना बिल्कुल उचित नहीं होगा कि जन्म दर का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। मेघालय में इसाई महिलाएं, मुस्लिम महिलाओं के मुकाबले ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं। यह राज्य ज्यादा जन्म दर के मामले में बिहार के बाद देश में दूसरे नंबर पर है।



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