बृहस्पतिवार, 12 दिसम्बर 2019 | 06:02 IST
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क्यों है उपनिषदों को बचाने वाला भोजपत्र खतरे में जाने पूरी सच्चाई


भोज पत्र का नाम आते ही सबको उपनिषद के विभिन्न ग्रंथ याद आ जाते है। भोजपत्र का ख्याल आते ही उन प्राचीन पांडुलिपियों का विचार आता है जिन्हें भोजपत्रों पर लिखा गया है । दरअसल कागज की खोज के पूर्व हमारे देश में लिखने का काम भोजपत्र पर किया जाता था। गौरतलब है कि भोजपत्र पर लिखा हुआ सैकड़ों वर्षों तक वैसा ही रहता है । हमारे देश के कई पुरातत्व संग्रहालयों में भोजपत्र पर लिखी गई सैकड़ों पांडुलिपियां सुरक्षित रखी हैं । लेकिन जिस भोजपत्र पर भारतीय इतिहास के विभिन्न ग्रंथ और उपनिषद लिखे गए हैं, जिसे हिन्दु धर्म मे पवित्र माना जाता था आज वो भोजपत्र विलुप्ति की कगार पर है। भारत में हिंदु रिती रिवाजों के अनुसार भोजपत्र को पूजा जाता है, माना जाता है कि इसमें देवी देवता और ऋषिमुणिओं ने इसी पर भारत का इतिहास दर्शाया है, लेकिन आज वहीं भोजपत्र विलुप्त होने की कगार पर है। भोजपत्र के गायब होने की वह एक हर्बी बोडो नाम के कीड़े को बताया गया है, जो कि गर्मी के कारण जन्म लेता है। भोजपत्र ठंड़ी जगहों पर ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाता है। उत्तराखण्ड के टिम्बर एलपाइन जोन से लेकर निति माना वेली में भोज पत्र के जंगल पाये जाते थे। श्रीनगर स्थित गोविन्द बल्लभ पन्त रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोध के अनुसार 1989 से संस्थान के वैज्ञानिक भोजपत्र पर अध्ययन कर रहे हैं अध्ययन मे पता चला कि कुछ वर्षो से भोज पत्र हर्बी बोडो नाम के कीडे का शिकार बनता जा रहा है। गोविन्द बल्लभ पन्त रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है की इस कीडे का जन्म भी हालिया वर्षो में हुआ है, कीडे के जन्म का कारण वैज्ञानिक ग्लोबल वॉर्मिग को बता रहे हैं। वैज्ञानिको का कहना है की अब 3200 से 5 हजार फिट के ऊंचाई वाले इलाकों मे अब गर्मी बढ़ने लगी है जो इस किडे को जन्म दे रही है।

 

वहीं हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के वनस्पती विज्ञान के प्रोफेसर और छात्रों का भी कहना है कि अगर भोज पत्र को बचाना है तो भोजपत्र को उसी रेंज में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उगाना होगा। और अगर युं ही इन क्षेत्रों में गर्मी बढ़ती रही तो भोजपत्र का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। और अपने में इतिहास समेटी भोजपत्र खुद एक इतिहास बन जाएगा।

 

 



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