बृहस्पतिवार, 17 अक्टूबर 2019 | 01:43 IST
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खुल गए भगवान फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट


समुद्र तल से लगभग दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। भगवान फ्यूंला नारायण को दूध और मक्खन का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण की पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी।

भगवान फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट खुलने पर भगवान नारायण के स्नान के बाद फ्यूंला के फूलों से श्रृंगार किया जाता है। इससे पूर्व ग्रामीण अपनी गायों को लेकर फ्यूंला नारायण पहुंचते हैं और इन्हीं गायों के दूध और मक्खन का भगवान को भोग लगाया जाता है। खास बात यह है कि यहां पुजारी की जगह महिलाएं भगवान का श्रृंगार करती हैं। जिसके बाद पुजारी, श्रृंगार करने वाली महिला और गाय कपाट बंद होने तक फ्यूंला नारायण मंदिर में रहते हैं। भगवान को हर दिन तीनों पहर भोग लगता है। इस बार भगवान नारायण का श्रृंगार गोदांबरी देवी ने किया। उन्होंने कहा कि यह अधिकार महिलाओं को पीढिय़ों से मिला हुआ है।

फ्यूंला नारायण के पुजारी पूर्ण सिंह के नेतृत्व में भर्की पंचनाम देवता के मंदिर से चिमटा और घंटी लेकर भेटा, भर्की, गवाणा, अरोशी सहित उर्गम घाटी के सैकड़ों लोग फ्यूला नारायण धाम के लिए रवाना हुए। 11 बजे भगवान फ्यूंला नारायण के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण और विशेष पूजा-अर्चना के बाद खोले गए। यहां महिलाओं के हाथों भगवान फ्यूंला नारायण का श्रृंगार होता है। इस पौराणिक मंदिर में ठाकुर जाति का पुजारी होता है। मंदिर के आसपास उगने वाले विशेष फूल फ्यूंला की वजह से भगवान को फ्यूंला नारायण कहा जाता है। यह दक्षिण शैली में बना पौराणिक मंदिर है। महिला पार्वती देवी ने फ्यूंला नारायण में भगवान का फूल श्रृंगार किया। 

फ्यूंला नारायण मंदिर के पुजारी रघुबीर सिंह बताते हैं कि परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट श्रवण संक्रांति को खुलते हैं व डेढ़ माह बाद नंदा अष्टमी को बंद कर दिए जाते हैं। क्षेत्र के भेटा, भर्की, गवाणा व अरोशी सहित उर्गम घाटी के दर्जनों गांवों के लोग मंदिर में हक-हकूकधारीहैं। कपाट खुलने पर भर्की के पंचनाम देवता (भूम्याल) मंदिर से पुजारी सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ फ्यूंला नारायण मंदिर पहुंचते हैं। जबकि भर्की के भूम्याल देवता यात्र की अगवानी करते हैं। उर्गम सडक़ मार्ग से फ्यूंला नारायण मंदिर चार किमी पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है।



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