रविवार, 27 सितंबर 2020 | 10:55 IST
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नौ राज्यों तक रोशनी पहुंचा रहा टिहरी डाम..



दुनिया का सुप्रसिद्ध टिहरी डाम आज सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया को रोशन कर रहा है। रॉकफिल टिहरी बांध आज देश के नौ राज्यों को बिजली दे रहा है, जबकि दिल्ली और उत्तररप्रदेश में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध करा रहा है। 2400 मेगावाट की इस जल विद्युत परियोजना के लिए टिहरी शहर को जलमग्न होना पड़ा था, जिसमें 37 गांव पूर्ण रूप से डूब गए, जबकि 88 गांव आंशिक रूप से इससे प्रभावित हुए।


टिहरी जिले में भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम पर बने टिहरी बांध निर्माण को वर्ष 1972 में स्वीकृति मिली और वर्ष1977-78 में बांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ। भूकंप से नुकसान को रोकने के लिए टिहरी बांध को रॉकफिल बनाया गया। इसमें टिहरी बांध की झील का पानी रोकने के लिए बनी दीवार पूरी तरह से पत्थर और मिट्टी भरकर बनाई गई है। 29 अक्टूबर 2005 को टिहरी बांध की आखिरी सुरंग बंद हुई और झील बननी शुरू हुई। जुलाई 2006 में टिहरी बांध से विद्युत उत्पादन शुरू हुआ। टिहरी बांध से फिलहाल एक हजार मेगावाट और कोटेश्वर बांध से 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।

एक हजार मेगावाट उत्पादन के लिए अभी पंप स्टोरेज प्लांट का कार्य किया जा रहा है। इसका काम पूरा होने के बाद टिहरी बांध से 2400 मेगावाट बिजली उत्पादन हो सकेगा। टिहरी बांध के कारण 125 गांव प्रभावित हुए। इनमें 37 पूर्ण रूप से झील में डूबे गए, जबकि 88 गांव आंशिक प्रभावित हुए। हजारों लोगों को टिहरी और उसके आसपास के क्षेत्रों से विस्थापित कर देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में बसाया गया।
टिहरी और गांव खाली होने के बाद बांध के लिए यहां पर 42 वर्ग किमी लंबी टिहरी झील बनाई गई। टिहरी बांध से 2,70,000 हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई और प्रतिदिन 102.20 करोड़ लीटर पेयजल दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड को उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित है। आपको बता दें, बरसात के मौसम में इस झील का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन इसके बाद भी स्थानीय इलाकों में इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है।

 



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