सोमवार, 23 सितंबर 2019 | 09:20 IST
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आशीष डंगवाल जैसे शिक्षकों की आवश्यकता है आज पहाड़ के गांव को


उत्तराखंड के शिक्षा के हालात कैसे हैं ये बात किसी से छिपी नहीं है। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में आज शिक्षक जाना नहीं चाहते। जो स्कूल है,उन तक पहुंचने के लिए शिक्षकों,छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस सब के बीच यदि पहाड़ के किसी दूरस्थ क्षेत्र के स्कूल से किसी अध्यापक के ट्रांसफर होने पर उसकी विदाई पर गांव का हर एक शख्स बड़ा-बुढ़ा, महिलाएं और बच्चे रोने लगे,तो सच मानिए पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी शिक्षा की अलख जगाने वाले बहुत शिक्षक है। कुछ ऐसी अलख जगायी है आशीष डंगवाल जी ने।

उत्तरकाशी जिले के केलसु घाटी में शिक्षक आशीष डंगवाल की विदाई कुछ इस ढंग से हुई कि इस विदाई की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। स्कूल में रोते बिलखते बच्चे और इन बच्चों की आंखों में आंसू उस शिक्षक के लिए हैं जिसने इनकी जिंदगी ही बदल दी। लेकिन इन छात्रों को अफसोस इस बात का है कि इनके फेवरेट शिक्षक आशीष का यहां से ट्रांसफर हो गया है। सभी छात्रों की जुबान पर एक ही बात है कि मास्टर जी हमें छोड़कर मत जाओ।

ट्रांसफर होने के बाद शिक्षक आशीष की विदाई में एक-दो नहीं बल्कि पूरा गांव रोया। स्कूल के बच्चे रो रहे थे और वह लोग जिनके बच्चे इस स्कूल में पढ़ते थे वो भी खूब रोये। लेकिन अपने कर्तव्य के आगे शिक्षक आशीष भी मजबूर थे। निश्चित तौर पर यह गुरूजी आशीश डंगवाल के व्यवहार,मान-सम्मान और बच्चों को शिक्षा के माध्मय से नयी दिशा देने का परिणाम हैं कि उनके ट्रांसफर होने पर पूरा गांव और स्कूल के बच्चे उनसे गले मिलकर फुट-फुट कर रोए और उनसे वहां से न जाने की विनती करते रहे।

उत्तराखंड में ज्यादातर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद खराब है। ऐसे में जरूरत है आशीष डंगवाल जैसे शिक्षकों की जिनके जाने मात्र से स्कूल के बच्चे और क्षेत्र के लोग रोने भी बिलखने लगे। इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस शिक्षक का क्या महत्व रहा होगा इस इलाके में।

वहीं शिक्षक आशीष डंगवाल ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर क्षेत्र के लोगों और बच्चों के लिए लिखा कि “मेरी प्यारी #केलसु #घाटी, आपके प्यार, आपके लगाव ,आपके सम्मान, आपके अपनेपन के आगे, मेरे हर एक शब्द फीके हैं । सरकारी आदेश के सामने मेरी मजबूरी थी मुझे यहां से जाना पड़ा ,मुझे इस बात का बहुत दुख है ! आपके साथ बिताए 3 वर्ष मेरे लिए अविस्मरणीय हैं। #भंकोली, #नौगांव , #अगोडा, #दंदालका,#शेकू, #गजोली,#ढासड़ा,के समस्त माताओं, बहनों, बुजुर्गों, युवाओं ने जो स्नेह बीते वर्षों में मुझे दिया मैं जन्मजन्मांतर के लिए आपका ऋणी हो गया हूँ। मेरे पास आपको देने के लिये कुछ नहीं है ,लेकिन एक वायदा है आपसे की केलसु घाटी हमेशा के लिए अब मेरा दूसरा घर रहेगा ,आपका ये बेटा लौट कर आएगा। आप सब लोगों का तहेदिल से शुक्रियादा । मेरे प्यारे बच्चों हमेशा मुस्कुराते रहना। आप लोगों की बहुत याद आएगी।”

 



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