सोमवार, 8 अगस्त 2022 | 07:10 IST
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स्वामी विवेकानंद के जन्म दिन पर जानें उनसे जुड़ी कुछ खास बातें


तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ ख़ुद के अंदर से सीखना है क्योंकि आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं होता।‘
 
किसी भी देश की प्रगति में युवा की भागीदारी सबसे अहम होती है। जिस देश की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा युवा हो तो फिर उस देश को तरक्की करने और हर क्षेत्र में आगे बढ़ने से नही रोका जा सकता है। लेकिन सबसे अहम बात ये है कि युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन के साथ-साथ बेहतर शिक्षा मिले। इसी उद्देशय से प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। 12 जनवरी को जन्में स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिन के उपलक्ष में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है।
 
12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्में विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन में वीरेश्वर नाम से पुकारे जाने वाले विवेकानंद एक कायस्थ परिवार में जन्में थे। विवेकानंद के पिता कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रतिष्ठित वकील थे। परिवार में दादा के संस्कृत और फारसी के विद्वान होने के कारण घर में ही पठन-पाठन का माहौल मिला था। 
 
स्वामी विवेकानंद की आरंभिक शिक्षा कोलकाता में हुई। विद्यालय से पूर्व उनका ज्ञान संस्कार घर पर ही किया गया। दादा तथा माता-पिता की देख-रेख में उन्होंने विद्यालय से पूर्व ही , सामान्य बालकों से अधिक जानकारी प्राप्त कर ली थी। इसके बाद नरेंद्रनाथ ने 25 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था और सन्यासी बन गए थे। 
 
स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं
2.ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है |
3.उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तमु अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते |
4.जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है |
 
 
स्वामी विवेकानंद भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति की जीवंत प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने संपूर्ण विश्व को भारत की संस्कृति, धर्म के मूल आधार और नैतिक मूल्यों से परिचित कराया। स्वामी जी वेद, साहित्य और इतिहास की विधा में निपुण थे। स्वामी विवेकानंद को सयुंक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में हिन्दू आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार प्रसार किया। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था. युवावस्था में वह गुरु रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आये और उनका झुकाव सनातन धर्म की और बढ़ने लगा। उन्हें 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में दिए गए अपने भाषण के लिए जाना जाता हैं। इस दिवस मानाने का मुख्य उद्देश्य भारत के महानतम समाज सुधारक, विचारक और दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों और विचारों को देश भर के भारतीय युवाओं को प्रोत्साहित  करवाना है और ताकि वो इन्हें अपने जीवन में उतारा डा सकें। भारत सरकार ने सन 1985 से हर वर्ष12 जनवरी यानी स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को ये बताना है कि जिस तरह से स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन में सफलता हासिल की, ठीक उसी तरह उनके विचारों को अपनाकर युवा पीढ़ी भी सफलता हासिल कर सकें।अमेरिका , यूरोप , रूस , फ्रांस आदि विकसित देशों ने भी स्वामी जी के विचारों को सराहा। स्वामी विवेकानंद का निधन दिल का दौरा पड़ने से 39 वर्ष की आयु में 4 जुलाई 1902 को हुआ था।


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