सोमवार, 15 जुलाई 2024 | 05:15 IST
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बागपत से ही चुनाव मैदान में क्यों उतर रहे हैं जयंत चौधरी ?


लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. यूपी की 80 लोकसभा सीटों को लेकर भी राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से समीकरण साध रहे हैं. सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के साथ भले ही समाजवादी पार्टी का गुणा-गणित सेट न हो पाया हो लेकिन इससे पहले राष्ट्रीय लोकदल के साथ सपा की सीटों को लेकर बात बन गई है. 
इसको लेकर शुक्रवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी है. उन्होंने लिखा, ''लोकसभा चुनाव के लिए सपा और आरएलडी के बीच सीटों का समझौता हुआ. राष्ट्रीय लोक दल और सपा के गठबंधन की सभी को बधाई!जीत के लिए सभी एकजुट हो जाएं, जुट जाएं!''
अखिलेश यादव की इस पोस्ट का जवाब रालोद नेता ने दिया है. उन्होंने लिखा- राष्ट्रीय, संवैधानिक मूल्यों के रक्षा के लिए सदैव तत्पर, हमारे गठबंधन के सभी कार्यकर्ताओं से उम्मीद है, अपने क्षेत्र के विकास और ख़ुशहाली के लिए कदम मिलाकर आगे बढ़ें!
इसके बाद तय है कि एसपी और आरएलडी के बीच सीटों का तालमेल हो गया है। हालांकि आधिकारित तौर पर उन सीटों का ऐलान नहीं हुआ है कि कौन सी सीटें आरएलडी को दी जा रही हैं, 
हालांकि कांग्रेस ने अंदरखाने इस पर अपना समर्थन नहीं दिया है। कांग्रेस को लगता है कि उसकी भी रजामंदी ली जानी चाहिए थी। 
हिमालयन न्यूज़ आपको बताएगा इन सीटों पर आरएलडी अपने प्रत्याशी उतारने की रणनीति तैयार कर रहा है। इसमें सबसे प्रमुख सीट बागपत है की है। बागपत सीट पर इस बार भी जयंत चौधरी मैदान में उतरेंगे और पिछली बार की हार का बदला लेंगे।
यूपी में एसपी और आरएलडी इस बार इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। पिछली बार इन दोनों के साथ बीएसपी का गठबंधन का था। पिछली बार एसपी को पांच, बीएसपी को दस और आरएलडी को कोई सीट नही मिल पाई थी। लेकिन इस बार जयंत चौधरी ने बड़ी रणनीति तैयार की है। अखिलेश और जयंत के बीच 7 सीटों पर सहमति बन गई है, हालांकि कांग्रेस के साथ अभी तक सीटों का तालमेल नहीं हो पाया है। कांग्रेस यूपी में 25 सीटें मांग रही हैं, लेकिन खबर है कि अखिलेश किसी भी हाल में 15 सीटों से ज़्यादा देने के मूड में नहीं हैं। हर हाल में 55 सीटों पर एसपी चुनाव मैदान में उतरन चाहती है। हालांकि एसपी अभी तक 65 सीटों का दावा ठोक रही है, लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो वो 55 तक उतर सकती है। यूपी की कुल 80  सीटों में से 7 सीटें आरएलडी को दी जाएंगी.  
अब आपको बताते हैं कि कौन कौन सी सीटों पर आरएलडी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी तो ये सीटें हैं पश्चमी यूपी की बागपत, मथुरा, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा और कैराना हैं।
अखिलेश और जयंत ने आपस में मिलकर इन सीटों को तय कर लिया है। अब इन सीटों पर कांग्रेस भी नहीं उतर सकती है। तो तय है कि बीएसपी, बीजेपी और आरएलडी प्रत्याशियों के बीच इन सीटों पर घमासान होने वाला है। 
बागपत सीट आरएलडी के लिए इसलिए प्रतिष्ठा की सीट है, क्योंकि 1977, 1980 और 1984 में यहां से लगातार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह सांसद चुने गए थे। इसके बाद उनके बेटे अजित सिंह यहां से 6 बार सांसद रहे। 1989, 1991, 1996, 1999, 2004 और 2009 में अजित सिंह बागपत से जीते। वह केवल 1998 में हारे थे इसके बाद 2014 में वह तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे। राष्ट्रीय राजनीति में मोदी के उदय के बाद से पश्चिम यूपी में बीजेपी मजबूत होती गई। 
हालांकि पिछले दो चुनावों के रिजल्ट को देखें तो इस सीट पर बीजेपी के सांसद सत्यपाल सिंह ने जीत दर्ज की है. सत्यापल सिंह ने जहां साल 2014 के चुनाव में छोटे चौधरी यानी अजित सिंह को तो साल 2019 के चुनाव में रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को हराया था. हालांकि अब देखना ये है कि जयंत चौधरी इस चुनाव में अपनी पारवारिक सीट को किस तरह से बचा पाएंगे. पिछले चुनाव में जंयत चौधरी की इस सीट पर 25 हजार से अधिक वोटों से हार हुई थी, वहीं अजित सिंह को इस सीट पर करारी हार हुई थी.
2019 में बीजेपी के डॉ. सत्यपाल सिंह इस सीट पर 23502 वोटों से चुनाव जीते हैं। आरएलडी के लिए अच्छी बात ये रही कि 2014 में जहां अजित सिंह तीसरे नंबर पर थे 2019 में जयंत सीधे मुकाबले में आ गए थे और मोदी लहर के बावजूद केवल 25 हजार के अंतर से हारे थे। आरएलडी को उम्मीद है कि इस बार वो अंतर खत्म हो जाएगा और जयंत बीजेपी को बड़े मॉर्जिन से हराने में कामयाब होंगे। इसके लिए आरएलडी ने लंबे समय से तैयारियां शुरू कर दी थी। लंबे समय से क्षेत्र में समरसता अभियान चल रहा है। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव लोगों के बीच जा रहे हैं. हिन्दू-मुसलिम और किसान एकता के संदेश दिए जा रहे हैं। 
साल 1967 में बागपत लोकसभा सीट पर सबसे पहला चुनाव हुआ था. इस चुनाव में जनसंघ के रघुवीर सिंह शास्त्री की जीत हुई, इसके बाद साल 1971 में इस सीट पर राम चंद्र विकल कांग्रेस के सीट से जीते. वहीं फिर साल 1977, 1980 और 1984 में पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह जनता पार्टी और लोकदल के टिकट पर जीते. इसके बाद साल 1989, 1991 और 1996 में जनता दल और कांग्रेस के टिकट पर जीत. वहीं वह इस सीट पर साल 1997 में निर्दलीय भी जीत चुके हैं. इसके बाद फिर इस सीट पर बीजेपी ने साल 1998 में अपना खाता खोला और इस बार बीजेपी उम्मीदवार सोमपाल शास्त्री की जीत हुई. इसके बाद साल 1999, 2004 और 2009 में रालोद के टिकट पर अजित सिंह जीते और फिर साल 2014 और 2019 में बीजेपी उम्मीदवार सत्यपाल सिंह की जीत हुई. तो इस बार जयंत चौधरी यहां पर झंडा गाड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। 

 



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