रविवार, 23 फ़रवरी 2020 | 01:24 IST
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शीतकाल के लिए बंद हुए भगवान रुद्रनाथ जी कपाट


उत्तराखंड में चार धामों से जुड़े मंदिरों की कपाट बंदी का सिलसिला शुरू हो चला है। गढ़वाल हिमालय स्थित चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट शुक्रवार को पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से सुबह सात बजे शीतकाल तक के लिए बंद कर दिए गए। भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली को लेकर भक्त गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गए हैं। अब शीतकाल में छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपीनाथ मंदिर में की जाएगी। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को बंद होंगे। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट 21 नवंबर को बंद होंगे।

रुद्रनाथ के कपाट शुक्रवार को प्रात: ब्रह्म मुहुर्त पर शीतकाल के लिये बंद हो गये हैं। भगवान रुद्रनाथ जी का उत्सव विग्रह डोली में सजकर शुक्रवार को ही संध्या काल गौ धूलि के समय गोपेश्वर गोपीनाथ के मंदिर में पहुंची। यहां हजारों भक्तों ने भगवान के आगमन पर आरती उतारी और दर्शन किए।

शुक्रवार प्रात: 4.25 मिनट पर पुजारी जी ने गुफा मंदिर में प्रवेश किया। जिसके बाद मंत्रोच्चार के साथ भगवान के दिव्य स्नान की तैयारी हुई। 4.55 पर महाभिषेक चंदन,भस्म, आभूषणों , हिमालयी फूलों से अर्चान वंदन कि गई उसके बाद 5.55 पर रुद्राभिषेक किया गया और 6.45 पर फिर सभी देवताओं का आवह्न करना कि आयें भगवान के कपाट शीतकाल के बंद होने हैं अब शीतकाल में आप ही भगवान की पूजा दर्शन का दायित्व मानव से प्राप्त करें। 6.55 मिनट पर हजारों हिमालयी पुष्पों, जडी बूटियों, पवित्र हिमालयी वनस्पतियों और मंत्रो से भगवान रुद्रनाथ के विग्रह को ढकना शुरू किया गया। इस क्रिया को भगवान की महाधिस्थ स्थिति कहा जाता है। इसके बाद गुफा के सभी देवताओं का वंदन किया और इसी के साथ प्रातः 7 बजे मंत्रोच्चार के भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट बंद कर दिए गए। प्रातः 7.15 मिनट पर भगवान से आज्ञा लेकर यह पवित्र डोली गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर के रवाना हो गई।

 

 



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