शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024 | 08:34 IST
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अपनी बेटियों की शादी क्यों नहीं होने देते थे मुगल बादशाह ?


पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में मुगल बादशाह अकबर की महानता के किस्से भरे हुए हैं। अकबर की वीरता, हिन्दुओं की प्रति उनकी नरमी, कई हिन्दू राजकुमारियों से निकाह, अकबर-बीरबल के किस्से, मुसलिम धर्म छोड़कर दीन-ए-ईलाही नामके नए धर्म में आस्था जताना, अकबर को महानता के दर्जे में लाने के लिए इतिहास में दर्ज बातें हैं। लेकिन ये पूरी तरह सच नहीं है। सच्चाई ये है कि अकबर को अपने जीवनकाल में बादशाहत करने के लिए बहुत लंबा समय मिला। इस दौरान उन्होंने पूरी जिन्दगी में जमकर अय्याशी की। 'अकबरनामा' लिखने वाले अबू फजल के मुताबिक अकबर के समय हरम में करीब 5 हजार महिलाएं थी. इन पांच हजार औरतों में ज़्यादातर ऐसी मजबूर औरतें थीं जो दूसरे बादशाहों को हराने के बाद जबरन पकड़ कर लाई गई थीं। इनका इस्तेमाल 
बादशाह अकबर की रातें रंगीन करने में होता था। इसके अलावा अकबर की 11 रानियां भी थीं, जिनमें से सबसे बड़ी रानी उनकी चचेरी बहन थीं। इसके अलावा अकबर ने अपने पिता समान सैन्य कमांडर बैर्रम खां की बीवी के साथ  भी निकाह कर लिया, जिसने उसे बेटे जैसा प्यार दिया। बैर्रम खान को ऐसे युद्ध पर भेजा गया था, जहां शहादत तय थी। 
बहुत ही कम लोग ये बात जानते हैं की अकबर की तीन बेटियां थी जिनको अकबर ने आपने जीते जी कुंवारी रखा। पूरी जिन्दगी वो प्यार को तरसती रहीं। अकबर की बेटी आराम बानो बेगम की तो 
केवल 40 साल में मौत हो गई थी। 
फ़्रेंच इतिहासकार फ़्रांसुआ बर्नियर अपनी किताब, 'ट्रैवेल्स इन द मुग़ल एम्पायर' में लिखा है कि मुगलों के लिए अपना आन मान शान को बरक़रार रखना बेहद जरूरी था और बेटी की शादी में पिता को सर झुकाना पड़ता है इसलिए उन्होनें कभी भी अपनी बेटियों को कुंवारी रखा. अकबर से शुरू हुई ये परंपरा आगे चलकर शाहजहां, जहांगीर और औरंगजेब ने भी अपनाई। उन्होने भी कभी अपनी बेटियों की शादी नहीं की और हमेशा कुंवारी रखा. इतना ही नहीं बेटियां किसी मर्द से मिल न सकें, इसके लिए ऐसे सैनिकों को लगाया गया, जिनको किन्नर बनाया जा चुका था। आशुतोष गोवारिकर की फिल्म जोधा अकबर में भी जोधा बाई के साथ एक किन्नर को दिखाया गया है जो उनकी खिदमत में लगा रहता था। 
अब आप सोचिये हर बाप का सपना होता है कि उसकी बेटी की शादी अच्छे से अच्छे घर में हो, लेकिन बेटियां की शादी को दूर उनको किसी से प्यार न हो जाए, इसलिए मर्द को ही जिन्दगी भर दूर कर देना, कहां की इंसानियत है। राजकुमारी होना उस दौर में पाप हो गया था- उनकी जिन्दगी ऐसी थी जैसी सोने के पिजरे में कैद कोई सुन्दर पक्षी। उस पर वे रात-दिन अपने बाप और भाइयों के हरम में जाने और अय्याशी करने के किस्से सुनती रहतीं। अपनी सगी और सौतेली मांओं के एक के बाद एक बच्चे पैदा होते देखती रहतीं, लेकिन खुद कभी न मां बन सकतीं और न ही प्रेमिका। अब ऐसी सूरत में एक कमरे में बन्द कई औरतें अपनी जरूरत कैसे पूरी करती होंगीं, आप खुद समझ सकते हैं। शहजादी होने का उनको इतना ही फायदा था कि दासियां हर समय सेवा में मौजूद रहती थीं। 
शायद यही कारण था कि शाहजहां की बड़ी बेटी जहांआरा का नाम पिता के साथ ही जोड़ा जाता है। 
फ़्रेंच इतिहासकार फ़्रांसुआ बर्नियर ने अपनी किताब, 'ट्रैवेल्स इन द मुग़ल एम्पायर' में शाहजहां और उनकी बड़ी बेटी जहांआरा के संबंधों पर उंगली उठाई है। किताब में बर्नियर लिखते है, ''जहाँआरा बहुत सुंदर थीं और शाहजहाँ उन्हें पागलों की तरह प्यार करते थे. जहाँआरा भी शाहजहां का बहुत ज़्यादा ख्याल रखती थीं। इसको लेकर उनका भाई जहांगीर भी चिढ़ता था।लेकिन बेहद शिक्षित और समझदार होने के कारण जहांआरा की सभी इज्जत किया करते थे। 
बर्नियर ने लिखा है, ''उस ज़माने में हर जगह चर्चा थी कि शाहजहाँ के अपनी बेटी के साथ नाजायज़ ताल्लुक़ात हैं. कुछ दरबारी तो चोरी-छिपे ये कहते सुने जाते थे कि बादशाह को उस पेड़ से फल तोड़ने का पूरा हक़ है जिसे उसने ख़ुद लगाया है.''
तो ऐसे घिनौने किस्सों से भरी हुईहैं मुगल बादशाहों का इतिहास। लेकिन ये सच्चाइयां आम जनता तक लाने नहीं दी जाती। वैसे ये भी कह सकते हैं कि जो राजा बनता है, उसमें अकूत ताकत के साथ बुराइयां आ ही जाती हैं। आपका इसके बारे में क्या कहना है, अपनी राय कॉमेन्ट बॉक्स के जरिए जरूर रखें। 

 



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