सोमवार, 30 मार्च 2020 | 12:08 IST
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16 खूबसूरत सुरंगों से गुजरेगी, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन


भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी कर्णप्रयाग रेल परियोजना के बाद उत्तराखंड के चारों धाम को भी रेल सेवा से जोड़ने का खाका तैयार हो चुका है। इसके तहत चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री का रेकी सर्वे पूरा हो गया है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना पर इन दिनों तेजी के साथ काम चल रहा है।

इस बारे में मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी ने विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल से मुलाकात की,जिस दौरान उन्होंने श्री अग्रवाल को बताया कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के तहत कुल 16 सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इनकी कुल लंबाई 125 किलोमीटर होगी। परियोजना पर 16 हजार 720 हजार करोड़ का बजट खर्च होगा।

बैराज स्थित कैंप कार्यालय में विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल से मुलाकात के दौरान परियोजना प्रबंधक ने विधानसभा अध्यक्ष को रेल प्रोजेक्ट से जुड़ी अहम जानकारियों और प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि चार फरवरी को योग नगरी ऋषिकेश में तैयार किए गए रेलवे परियोजना का अधिकारियों की ओर से स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। परियोजना का शेष कार्य निरंतर गतिमान रहेगा।

इस मौके पर प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण से पूरे उत्तराखंड की दिशा और दशा बदल जाएगी। श्री अग्रवाल ने कहा कि इस रेल परियोजना से प्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर होगा। परियोजना की बारीकियों से अवगत कराते हुए मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2024 तक बनकर तैयार होगा।

आपको बता दें कि वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार गठित होने पर उत्तराखंड वासियों के बहुप्रतीक्षित स्वप्न के मूर्त रूप लेने के आसार बने। मोदी सरकार ने कर्णप्रयाग तक रेल लाइन बिछाने के संकल्प को व्यक्त किया और तमाम औपचारिकताओं को पूरा करते हुए सत्ता संभालने के लगभग दो वर्ष के भीतर वर्ष 2016 में इस रेल परियोजना को 16,216 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान कर दी। 

125 किमी लंबी इस रेलवे लाइन के निर्माण का लक्ष्य वर्ष 2024-25 तक रखा गया है। इस रेल परियोजना में 12 स्टेशन, 17 सुरंगों व 35 पुलो का निर्माण किया जाएगा। यात्रियों के लिए रोमांचकारी साबित होने वाली इस रेलवे लाइन में सबसे लंबी सुरंग 15 किमी की होगी। रेलवे लाइन के निर्माण के बाद उत्तराखंड जहां परिवहन कनेक्टविटी की दृष्टि से लंबी छलांग लगा सकेगा, वहीं पर्यटकों व तीर्थयात्रियों के लिए आवागमन का एक सुलभ व सस्ता साधन उपलब्ध हो सकेगा। रेल यातायात शुरू होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की दूरी, जिसे पूरा करने में सड़क मार्ग से लगभग 6 घंटे का समय लगता है, वो मात्र 2 घंटे में पूरी हो सकेगी। अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े उत्तराखंड में इस परियोजना का सामरिक कारणों से बेहद महत्व है। मगर इसके साथ ही पलायन जैसी समस्या से ग्रस्त राज्य के लिए रेल लाइन उम्मीदों की कई किरणों को साथ लेकर आएगी, यह मानना अति संयोक्तिपूर्ण नहीं होगा।

केंद्र सरकार द्वारा इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया है। इसकी सतत् निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की जा रही है। रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा निर्माणाधीन इस रेल परियोजना की प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा भी लगातार समीक्षा की जा रही है। गत बुधवार को मुख्यमंत्री रावत के समक्ष अधिकारियों ने बताया कि रेल परियोजना के लिए जरूरी भूमि का अधिग्रहण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को क्षतिपूर्ति के मामलों का निपटारा जल्द से जल्द करने का निर्देश दिया है। बैठक में रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी है कि वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश सेक्शन का कार्य फरवरी 2020 तक पूर्ण हो जाएगा। न्यू ऋषिकेश से देवप्रयाग तक वर्ष 2023-24 व देवप्रयाग से कर्णप्रयाग तक का कार्य 2024- 25 तक पूर्ण होगा। यानि कि पहाड़ में रेल का सपना पूरा होने में 4 से 5 वर्ष का समय ही शेष रह गया है।

रेलवे के क्षेत्र में मोदी सरकार की उत्तराखंड के लिए एक अन्य सौगात चार धामों को रेल परिवहन से जोड़ने की है। लगभग 327 किमी लंबी इस परियोजना से उत्तराखंड स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ को रेल मार्ग से जोड़ा जाएगा। लगभग 40 हजार करोड़ से अधिक की इस परियोजना का लोकेशन सर्वे जारी है। यह सर्वे जनवरी 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। चारधाम रेल परियोजना में 21 रेलवे स्टेशन व 61 टनल प्रस्तावित हैं। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 



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