मंगलवार, 12 नवंबर 2019 | 05:38 IST
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प्रहलाद सिंह टिपानिया ने कबीर के भजनों से विदेशियों का जीता दिल


संत कबीरदास के भजनों में रूची रखने वाले भजनों के लोक शैली में गाने वाले प्रहलाद सिंह टिपानिया का आज जन्मदिन है। प्रहलाद सिह टिपानिया आज 63 साल के हो गये है। टिपानिया ने शुरूआती समये में गांव गांव घूमकर गाने गाये। गली गली में घूमके गाने वाले प्रहलाद आज दुनिया भर में पहचान बना चुके हैं। कबीर के भजनों को गाने की शुरुआत उन्होंने लूणियाखेड़ी गांव (मध्य प्रदेश के देवास में) से ही की। कबीर के भजनों को पूरी दुनिया में गुंजाने वाले टिपानिया बताते हैं कि उन्हें कबीर के भजनों की तरफ एक पक्षी ने मोड़ा था और वे उसी पक्षी को अपना शिक्षक मानते हैं। क्योंकि प्रहलाद पेशे से गायक होने के अलावा विज्ञान के शिक्षक भी हैं। कबीर के भजनों के लिए जाने जाने-वाले प्रहलाद अमरीका समेत विदेशों में भी शो करते हैं। विदेशों में प्रहलाद के गायन पर मोहित होने वालो की हद यहां तक है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर सारा भारत आकर उनकी शिष्य बनीं। साथ ही अपना नाम बदलकर अंबा सारा रखा। वे कबीर के भजनों का अंग्रेजी में अनुवाद कर रही हैं. टिपनिया के मुताबिक विदेशों में उनके भजन सुनने आने वालों में सबसे ज्यादा तादाद गैर हिंदी भाषियों की ही होती है. कबीर के दोहों को सुनाने के लिए ब-कायदा मांग की जा रही है। टिपानिया मानते है कि आज के समय में भी कबीर की लेखनी में इतनी ताकत है कि वो उन्होंने लोगों को बांधना शुरू कर दिया है। हालांकि वह ये भी मानते हैं कि कबीर को किसी किसी मठ में नहीं बांधा जा सकता, पर साथ ही कहते हैं कि कबीरपंथ भी एक तरह की सीमा ही है।



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