मंगलवार, 24 मई 2022 | 02:50 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
30 जून से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा          शंघाई मिले कोरोना का एक दिन में 23,000 से ज्‍यादा नए मामले          रूस ने भारत को दिए एस-400 मिसाइल सिस्टम के पार्ट्स          कर्नाटक हाईकोर्ट का हिजाब विवाद पर बड़ा फैसला,हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं          सीबीएसई की 10वीं की परीक्षाएं 26 अप्रैल से 24 मई तक, 12वीं की परीक्षाएं 26 अप्रैल से 15 जून तक आयोजित की जाएगी          केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने जारी की टर्म 2 परीक्षा के लिए 10वीं और 12वीं की डेटशीट          आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोका, आईटी ऑडिट का भी दिया आदेश          8 मई को खुलेंगे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट          कांग्रेस दफ्तरों में होगी सीडीएस जनरल बिपिन सिंह रावत और जनरल जोशी की फोटो         
होम | साहित्य | लेखक अमित श्रीवास्तव के कहानी संग्रह कोतवाल का हुक्का पर चर्चा व लेखक से संवाद का आयोजन

लेखक अमित श्रीवास्तव के कहानी संग्रह कोतवाल का हुक्का पर चर्चा व लेखक से संवाद का आयोजन


काव्यांश प्रकाशन की ओर से प्रकाशित अमित श्रीवास्तव के कहानी संग्रह  "कोतवाल का हुक्का" पर अनौपचारिक चर्चा व लेखक से संवाद कार्यक्रम का आयोजन रिजर्व पुलिस लाइन,रेसकोर्स स्थित सम्मेलन सभागार में किया गया। साहित्यिक विचार गोष्ठी में श्रीकांत दूबे ने कहानीकार के साथ उनकी कहानियों के शिल्प पर विमर्श किया संवाद के जरिए पुस्तक पर विस्तृत चर्चा की।

इस मौके पर लेखक ललित मोहन रयाल (शहरी विकास निदेशक, उत्तराखंड) एवं सूचना महानिदेशक रणवीर चौहान ने पुस्तक पर अपने विचार साझा किए।

आपको बता दें कि संग्रह में संवेदनशील मसलों पर कहानियाँ है। गलतफहमी व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के चलते भलमनसाहत में कदम उठाए सजायाफ्ता पुलिसकर्मियों की कहानियाँ भी हैं। जहाँ अधिकांश लघु कथाएं परिभाषिक सी प्रतीत होती है,वहीं लंबी कहानियां पुलिस की छवि और हैसियत को रेशा-रेशा खोल कर रख देती है।

कथाकार अमित श्रीवास्तव के लेखन में एक खास बात देखने में आती है की कहानी को वे कविता की दृष्टि से देखते हैं। वे पिटे हुए वर्तमान को मुग्ध इतिहास की नजर से देखने के पक्षधर कभी नहीं लगे। उनके पास भौगोलिक वृतांत अपने स्वरूप में पूर्णता को प्राप्त होते नजर आते हैं। चित्रण इतना सजीव कि उपमाएं और उपमान दृश्यचित्र की तरह उभर आते हैं। उनके लेखन में ठोस यथार्थ और गतिशील समय की गूंज है। भाषा इतनी सरल कि कोई भी बहता चला जाए।

संवाद परिचर्चा में कथाकर सुभाष पंत,नवीन नैथानी,डीएन भट्टकोटी,गंभीर पालनी,डॉ सविता मोहन,गीता गैरोला,राजेश सकलानी,दिनेश जोशी,भुवन चंद कुनियाल,शंखधर दुबे,देवेश जोशी,जितेंद्र भारती,राजेश पाल,राकेश जुगरान,रुचिता तिवारी,प्रिय आशुतोष,श्रीकांत दुबे,विनोद मुसान,सतेंद्र डंडरियाल,अरविंद शेखर,लक्ष्मी प्रसाद बडोनी आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम संचालन नितिन उपाध्याय ने किया। अंत में काव्यांश प्रकाशन की ओर से प्रबोध उनियाल ने आए हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: