बुधवार, 26 जून 2024 | 02:42 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
होम | विचार | रेल हादसे ने मोदी की 9 साल की मेहनत पर पानी फेर दिया ?

रेल हादसे ने मोदी की 9 साल की मेहनत पर पानी फेर दिया ?


ओडिशा के बालासोर में हुए भयानक रेल हादसे को 40 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है। अभी तक बचाव दल रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। इस भीषण दुर्घटना में 280 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी सैकड़ों घायलों का इलाज चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर तमाम पक्ष-विपक्ष के नेता मौके पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि घटना में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस हादसे के बाद सरकार और रेलवे पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कवच जैसी आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करने का दावा करने वाली भारतीय रेलवे से आखिर कहां चूक हो गई, जिससे इतना बड़ा रेल हादसा हो गया। इस हादसे को लेकर पूरी दुनिया हैरान है। विकसित देशों की कतार में खड़ा होने का दावा करने वाला भारत, क्या ट्रेन हादसों को नहीं रोक पा रहा है। इस हादसे ने मोदी सरकार के नौ साल की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। अब सवाल उठ रहा है क्या पीएम मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैश्नण का इस्तीफा लेंगे ? 
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़े बड़े दावों के साथ पिछले साल 'कवच' सिस्टम लॉन्च किया था। ये ऐसा सिस्टम है, जो इस तरह के ट्रेन हादसों को रोक सकता है। अगर एक ही पटरी पर किसी चूक से दो ट्रेनें आ जाएं, तो ये सिस्टम एक दूरी पर अपने आप ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक सकता है। ये सिग्नल पार करने और टक्कर रोकने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। जब इस सिस्टम का ट्रायल हुआ, तो खुद रेल मंत्री मौजूद थे। ऐसे में बालासोर हादसे के बाद कवच को लेकर सवाल उठना लाजमी है। हालांकि बताया जा रहा है कि जिस रूट पर ये हादसा हुआ वहां अभी तक कवच सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। तो सवाल उठता है कि क्या कवच सिस्टम क्या केवल अमीर यात्रियों की ट्रेनों के लिए है, गरीब यात्रियों के जान की कोई कीमत नहीं। 
बालासोर रेल हादसा बाहानगा बाजार स्टेशन के पास हुआ। जब भी कोई ट्रेन स्टेशन के पास से गुजरती है, तो आमतौर पर उसकी स्पीड कम की जाती है। लेकिन स्टेशन के करीब भी कोरोमंडल बहुत तेजी से चल रही थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस का इंजन वहां खड़ी मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया। इसी ट्रैक पर तेज रफ्तार से आ रही हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस कोरोमंडल एक्सप्रेस से भिड़ गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ट्रेन की स्पीड 125 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रही होगी। जब इतनी तेजी से ट्रेन दूसरी ट्रेन से टकराएगी तो कितना भयावह मंजर होगा इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। इतना ही नहीं बाहानगा बाजार स्टेशन से 300 मीटर पहले कोरोमंडल एक्सप्रेस की कुछ बोगी पटरी से उतर गईं। ट्रेन का इंजन आउटर लाइन पर खड़ी मालगाड़ी पर चढ़ गया। इसी दौरान ट्रैक पर अचानक से हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस आ गई और उसने तेजी से कोरोमंडल एक्सप्रेस को टक्कर मार दी। सवाल उठ रहा है कि एक रेलवे ट्रैक पर दो ट्रेनें कैसे आ गईं। रेलवे के जानकारों के अनुसार इसके पीछे दो वजह हो सकती हैं। पहली मानवीय भूल और दूसरा तकनीकी खराबी। हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
आपको बता दें कि हर रेलवे स्टेशन पर कंट्रोल रूम बना होता है, जहां एक डिस्प्ले पर सारी ट्रेनों को रेकॉर्ड रहता है। कौन सी ट्रेन किस ट्रैक पर आ रही है, उसे किस ट्रैक पर भेजा जाएगा। स्टेशन पर किस प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रुकेगी। इस तरह की सभी बातों को वहीं से कंट्रोल किया जाता है। डिस्प्ले पर हरे और लाल लाइट के माध्यम से ट्रैक पर नजर रखी जाती है। अगर पटरी पर ट्रेन है, तो वह लाल नजर आएगा। वहीं अगर ट्रैक खाली है तो वह हरे रंग से नजर आएगा। इस हादसे को देखकर लग रहा है कि शायद डिस्प्ले पर ट्रेन का सिग्नल सही नहीं दिखाई दिया होगा।
रेलवे के जानकारों के अनुसार, आजकल एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। पहले ट्रेनों के कोच एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते थे, लेकिन अब नए एंटी क्लाइम्बिंग कोच ट्रेन में लगाए गए हैं। ये एलएचबी कोच इस तरह से बनाए जाते हैं, जो एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते। ऐसे में ये सवाल पूछा जा रहा है कि इतनी टेक्नोलॉजी के बाद ये हादसा कैसे हो गया। इसे लोग रेलवे का एक बहुत बड़ा 'सिस्टमेटिक फेल्युअर' मान रहे हैं। जाहिर है इतने सवाल हैं तो जवाब तो सरकार को ही देना होगा और चुनावी साल में इस पर सियासत भी शुरू हो गई है। 

 



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: