रविवार, 20 सितंबर 2020 | 04:10 IST
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निर्भया के गुनाहगारों को तलाक भी नहीं बचा पाई


निर्भया के दरिंदों को आखिरकार आज फांसी पर लटा दिया गया है। हालकि दोषियों के वकील एपी सिंह की तरफ से हर वो संभव कोशिश की गई जिससे वो बच सकें। शायद यही कारण है कि दोषी अक्षय ठाकुर की पत्नी की लाक वाली चाल भी काम नहीं कर पाई।

 

इन चारो दोषियों में एक बिहार के औरंगाबाद जिले का अक्षय ठाकुर भी था. फांसी की तारीख से दो दिन पहले ही उसने अक्षय की पत्नी पुनीता सिंह ने जिले के फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, जिसे उसे बचाने के हथकंडे के रूप में देखा गया था। पुनीता देवी ने कहा था कि मैं बलात्कारी की विधवा की पहचान के साथ जीना नहीं चाहती। गुरुवार को दिल्ली में पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर उऩ्होंने कहा, मैं भी न्याय चाहती हूं। मुझे भी मार दो। मैं जीना नहीं चाहती. मेरा पति निर्दोष है।

 

अपने आठ साल के बच्चे के साथ आई अक्षय की पत्नी ने जज से कहा कि मुझे न्याय नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा, मुझे और मेरे बेटे को भी फांसी दे दो। हम कैसे जी पाएंगे? मैं भी न्याय चाहती हूं. मेरे और मेरे बेटे के बारे में तो सोचिए। इसपर जज ने कहा, यहां निर्भया की मां भी मौजूद हैं. आप उनसे अपनी बात कहिए।

 

गुनहगार अक्षय ठाकुर बिहार के औरंगाबाद जिले के नबीनगर प्रखंड के टंडवा थाना क्षेत्र में गांव लहंग-कर्मा का रहने वाला था। दोषी अक्षय अपनी पढ़ाई छोड़कर दिल्ली भाग गया था। उसे वारदात के पांच दिन बाद उसके गांव से पकड़ा गया था। लेकिन उसकी ये दलीले भी काम नहीं कर पायीं। उन्हें लग रहा था कि चौथी बार भी फांसी से बच जाएंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं।



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