रविवार, 7 जून 2020 | 12:45 IST
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जम्मू कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा, दो नए केन्द्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आए


जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दो केन्द्र शासित क्षेत्र बनाए जाने के बाद अविभाजित जम्मू कश्मीर में लगा राष्ट्रपति शासन गुरुवार को हटा दिया गया है। जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो नए केन्द्र शासित क्षेत्र के रूप में आज यानी गुरुवार से अस्तित्व में आए हैं। इसी के साथ ही देश में राज्यों की संख्या 28 रह गई और केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या बढ़कर नौ हो गई।

इससे पहले राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद जून 2017 में जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा दिया गया था और राज्यपाल शासन के छह महीने बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। दो नए केन्द्र शासित क्षेत्र के गठन के बाद बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की गई। संविधान का अनुच्छेद 356, जिसके तहत राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, केंद्र शासित क्षेत्रों पर लागू नहीं होता।

केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और इसके विभाजन की घोषणा पांच अगस्त को राज्यसभा में की थी। कानून के मुताबिक संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पुडुचेरी की तरह ही विधानसभा होगी, जबकि लद्दाख चंडीगढ़ की तर्ज पर बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा। केंद्रशासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवस्था और पुलिस पर केंद्र का सीधा नियंत्रण होगा, जबकि भूमि वहां की निर्वाचित सरकार के अधीन होगी। लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में होगा।

आरके माथुर बने लद्दाख के पहले उपराज्यपाल

पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर ने गुरुवार को केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने लेह के तिसूरू में सिंधु संस्कृति ऑडिटोरियम में एक समारोह में माथुर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। माथुर त्रिपुरा से 1977 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने आईआईटी से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर किया है। वह वर्ष 2015 में रक्षा सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वहीं गिरीश चंद्र मुर्मू को जम्मू कश्मीर का उपराज्यपाल बनाया गया है। वह आज श्रीनगर में पदभार ग्रहण करेंगे।

जम्मू कश्मीर और लद्दाख के अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाने से कारोबारियों के लिए मौके बढ़ेंगे। जानकारों का कहना है कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद से अभी तक कारोबारियों में स्थानीय प्रशासन को लेकर संशय की स्थिति बन गई है। लेकिन आज से दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के अस्तित्व में आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है। अब कारोबारियों को अपना कारोबार स्थापित करने में आसानी होगी और उन्हें जरूरत मंजूरियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

 

 



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