बुधवार, 20 नवंबर 2019 | 11:49 IST
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हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह नंदकिशोर नौटियाल का निधन


हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह माने जाने वाले नंदर किशोर नौटियाल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे।

नंद किशोर नौटियाल ने मुंबई से प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक हिंदी ब्लिट्ज की लंबे समय तक कमान संभाली। वह महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्यवाहक अध्यक्ष और ‘नूतन सवेरा’ के संपादक भी रहे।

नौटियाल जी काफी दिनों से बीमार थे और देहरादून में अपने पुत्र के साथ रह रहे थे। उन्होंने मुंबई महानगर के हिंदी भाषी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों की भी सक्रिय अगुवाई की। उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्री केदरानाथ की मंदिर समिति के भी वह अध्यक्ष रहे।

दिवंगत नौटियाल को हिंदी पत्रकारिता जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए हिंदी साहित्य सम्मेलन का साहित्य वाचस्पति सम्मान, आचार्य तुलसी सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का पत्रकार भूषण सम्मान, लोहिया मधुलिमये सम्मान समेत अनेक राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिले।

बहुत कम लोग जानते हैं कि 1946 के नौसेना विद्रोह के समर्थन में उन्हें जेल जाना पड़ा। 1948 में पत्रकारिता से जुड़े। नवभारत साप्ताहिक (मुंबई) से उन्होंने पत्रकारिता क्षेत्र में आगे बढ़े। गोवा मुक्ति संग्राम और पृथक हिमालयी राज्य और उत्तराखंड आंदोलन से भी जुड़े।

कई पत्र-पत्रिकाओं से होते हुए 1962 में मुंबई में साप्ताहिक हिंदी ब्लिट्ज से जुड़े। दस साल सहायक संपादक रहने के बाद 1973 में संपादक बने।

उन्होंने ब्लिट्ज़ संस्थान को सामाजिक-सांस्कृतिक दुनिया से जोड़ने की पहल की। ब्लिट्ज नेशनल फोरम के महासचिव रहे। नंदकिशोर नौटियाल के संपादन में ब्लिट्ज़ को लोगों ने इस हद प्यार किया कि आपातकाल में जयपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने ‘नौटियाल ब्रिगेड’ की स्थापना की। वाइस चांसलर को नौटियाल को जयपुर बुलाना पड़ा।

हिंदी ब्लिटज में छपी एक रिपोर्ट को साक्ष्य मानते हुए अदालत ने सागर विश्वविद्यालय के छात्रों को एक आपराधिक मामले में बरी किया। जनहित की इस नीति पर चलते हुए हिंदी ब्लिट़्ज की प्रसार संख्या साढ़े तीन लाख पहुंच गई। यह रिकार्ड नौटियाल के संपादकत्व में स्थापित हुआ था। 1992 में ब्लिट्ज़ से अवकाश के बाद उन्होंने नूतन सवेरा साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू किया। उन्होंने विश्व हिंदी सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

 उन्होंने नवभारत साप्ताहिक (मुंबई), दैनिक लोकमान्य (मुंबई) और लोकमत (नागपुर) में 1948 से 1951तक कार्य किया। 1951में दिल्ली प्रेस समूह की `सरिता’ पत्रिका से जुड़े। दिल्ली में `मजदूर जनता’, `हिमालय टाइम्स’, `नयी कहानियां’ और `हिंदी टाइम्स’ के लिए कई साल कार्य किया। नौटियालजी धीरे-धीरे मज़दूर आंदोलन की तरफ़ अग्रसर होते गये। 1954 से ’57 तक दिल्ली में सीपीडब्ल्यूडी वर्कर्स यूनियन के सचिव रहे और अनेक बार आंदोलन किये। उन्होंने कई मज़दूर संगठन बनाये और पत्रकार यूनियनों में सक्रिय रहे।

नंदकिशोर नौटियाल के निधन पर राज्यपाल बेबी रानी मोर्या एवं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित देश-प्रदेश के साहित्याकारों,पत्रकारों और संस्कृतिकर्मियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है.

 

 

 



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