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फिल्म ‘अवतार-2’ ने भारत में भी तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड, 10 बड़ी बातें


हॉलीवुड के महान डायरेक्टर में गिने जाने वाले जेम्स कैमरून की बनाई फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ पर्दे पर धूम मचा रही है। दो हजार करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म ने भारत में तीन दिन में  ही 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। माना जा रहा है कि भारत, चीन और अमेरिका के बूते ही फिल्म अपनी पूरी लागत निकाल लेगी। अगर पहले दिन के ही बिजनेस की बात कर लें तो भारतीय बाजार तीसरे नंबर पर था। पहले नंबर पर नॉर्थ अमेरिका और दूसरे पर चीन था। नॉर्थ अमेरिका में 36 मिलियन डॉलर की कमाई हुई वहीं चीन में 20 मिलियन डॉलर की कमाई हुई थी। वहीं यूनाइटेड किंगडम, साउथ कोरिया, फ्रांस और जर्मनी भारत से कमाई के मामले में पीछे हैं। यूनाइटेड किंगडम में 4.5 मिलियन डॉलर, साउथ कोरिया में 3.25 मिलियन डॉलर, फ्रांस में 2.90 मिलियन डॉलर की कमाई की गई हैं।

फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ सिनेमा में प्रयोगों का एक नया अध्याय है। जेम्स कैमरून ने जब इस सीरीज की अपनी पहली फिल्म ‘अवतार’ बनाई थी तो तमाम लोगों ने उन्हें इसके नतीजों को लेकर सचेत किया था। लोगों को लगता था कि जेम्स अपना करियर जिस प्रयोग के चलते दांव पर लगा रहे हैं, उसमें उनके हाथ कुछ नहीं आएगा। इतिहास गवाह है कि उस फिल्म ने दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का न सिर्फ तमगा पाया बल्कि इसकी सीक्वल का मार्ग भी प्रशस्त किया।

‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ देखने के बाद समझ आता है कि इंसान जो सोच सकता है, वह हासिल भी कर सकता है। ये फिल्म न सिर्फ इंसानी कल्पनाओं की उड़ान है बल्कि विश्व सिनेमा का एक नया अध्याय, एक नया मोड़ और एक ऐसा नया उदाहरण भी है जिसमें सिनेमा का भविष्य छिपा हुआ है। 

फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ देखना एक अनुभूति है। सिनेमाघर में बैठे दर्शक को अपने साथ समंदर  की लहरों, इसकी गहराइयों और इसके जीव जंतुओं की दुनिया में बहा ले जाने में निर्देशक जेम्स कैमरून पूरी तरह सफल रहे हैं। फिल्म इतनी अद्भुत, अलौकिक, अकल्पनीय और अविश्वसनीय है कि फिल्म की बाकी किसी कमजोरी पर दर्शक का ध्यान ही नहीं जाता।

फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ देखते समय यूं लगता है कि हम उन बॉलीवुड फिल्मों का आधुनिक संस्करण देख रहे हैं, जिनमें पारिवारिक मूल्यों, मानवीय संबंधों और सामाजिक अवधारणाओं पर जोर दिया गया है। इस फिल्म की कहानी भी उसी पैंडोरा की है जहां धरती से पहुंचे इंसानों को पहले एक बेशकीमती खनिज की तलाश थी, लेकिन सीक्वेल में कहानी 10 साल आगे आ चुकी है। धरती इंसानों के रहने लायक नहीं बची है और तलाश है एक ऐसे ग्रह की जहां इंसानों की बस्तियां बसाई जा सकें।

पूरी तरह से नावी बन चुके जेक सली और उसकी नावी प्रेमिका नेतिरी का परिवार बढ़ा हो गया है। दो बेटे, सगी और, एक गोद ली हुई बेटी है। साथ में एक इंसानी किशोर भी है, जिसे इंसानों से ज्यादा नावी समुदाय के  बीच रहना भाता है।

फिल्म का विलेन कर्नल माइल्स भले पिछली फिल्म में मर गया हो लेकिन उसकी यादों और उसके डीएनए से उसका अवतार बनाया जा चुका है। उसकी टुकड़ी भी नए अवतार में हैं। इनका मकसद है जेक सली को तलाशना और उसे खत्म करना।

फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ सिर्फ एक कहानी नहीं है। इसमें इतनी अंतरकथाएं हैं कि इनमें से हर एक का अलग विस्तार किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में शुरू से पढाया जाता है कि खुद से पहले परिवार, परिवार से पहले समुदाय और समुदाय से पहले देश होना ही चाहिए। जेक सली यही करता है। अपने अहं को त्याग कर वह परिवार बचाने की कोशिश करता है। समुदाय संकट में आता है तो वह अपने परिवार की खुशियां कुर्बान कर देता है।

रिश्तों के ताने बाने को मॉडर्न तकनीक और बारीकी से पर्दे पर समझना चाहते हैं तो इस फिल्म को ज़रूर देखिए। आप निराश नहीं होंगे।



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