रविवार, 27 सितंबर 2020 | 09:24 IST
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तिरंग में शहीद पिता को देखकर फूट-फूटकर रोया बेटा, जिसने भी देखा नहीं रोक सका आंसू...


उत्तराखंड सिर्फ देवों की भूमि ही नहीं है बल्कि यहां पर वीर सपूत भी पैदा होते हैं। तभी तो आज जैसे ही शहीद का शव घर पहुंचा वैसे ही शहीन को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।

आईटीबीपी के जवान जमीर अहमद का शव लेकर सेना की गाड़ी सोमवार देर रात को उनके घर उत्तराखंड के किच्छा पहुंची तो परिजनों में कोहराम मच गया। तिरंगे में लिपटे ताबूत से लिपटकर परिजन बिलखते रहे। पार्थिव देह के साथ आए आईटीबीपी के अधिकारियों ने जवान की टोपी मृतक के पुत्र सनाउल मुस्तफा को सौंपी।

 

शहीद जवान जमीर अहमद की कैप जब उनके पुत्र सनाउल को सौंपी गई तो सनाउल बिलख-बिलख कर रो पड़े। बाद में सनाउल काफी देर तक अपने पिता की कैप को चूम-चूम कर रोते रहे। इधर, घर पर मृतक की बेटी शहनाज भी बार-बार बेहोश हो रही थी।

 

 

देर रात सैकड़ों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने जवान के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी। कब्रिस्तान में हल्दूचौड़ से आई आईटीबीपी की टीम ने जवान को अंतिम सलामी दी। देर रात ही जवान के शव को सुपुर्दे खाक कर दिया गया। जमीर अहमद मूल रूप से बरेली के रहने वाले थे।

 

बता दें कि दोकलाम में तैनात जमीर अहमद की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां शनिवार को उनकी मौत हो गई थी। अरुणाचल प्रदेश से उनके पार्थिव देह को दिल्ली तक विशेष विमान से लाया गया। उसके बाद सड़क मार्ग से देर रात उनका शव सेना के वाहन से उनके घर लाया गया।

शव को देखते ही शहीद को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने श्र्दांजलि देते हुए शहीद को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।

 

 

 



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