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निवेश बढ़ाने के लिए अमेरिकी संस्था मैंकेंजी ग्लोबल की मदद, धामी सरकार की बड़ी तैयारी


पुष्कर सिंह धामी सरकार की योजना सफल रही तो पांच वर्षों में उत्तराखंड की वर्तमान अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना यानी लगभग 5.50 लाख करोड़ तक होगी। सरकार ने संकल्प लिया है कि वित्तीय वर्ष 2027-28 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) दोगुना किया जाएगा। प्रदेश में बड़े पूंजी निवेश की तैयारी के साथ इस संकल्प पर आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
दिसंबर में प्रस्तावित वैश्विक निवेशक सम्मेलन के माध्यम से ढाई लाख करोड़ रुपये के पूंजी निवेश धरातल पर उतारा जाएगा। इससे प्रदेश की आर्थिकी तो सशक्त होगी ही, साथ में बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित होंगे। अवस्थापना विकास कार्य भी गति पकड़ेंगे।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था 23 वर्षों में लगभग 19 गुना बड़ा आकार ले चुकी है तो इसके पीछे औद्योगिक विकास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2003 में केंद्र की तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उत्तराखंड को औद्योगिक पैकेज दिया था परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में उद्योग प्रदेश की ओर आकर्षित हुए। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को भी लाभ हुआ।
इस पैकेज के कारण ही प्रदेश में वर्तमान में 330 से अधिक बड़े और 70 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग हैं। इनमें 4.60 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके माध्यम से 52 हजार करोड़ का पूंजी निवेश राज्य में हुआ है।
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उद्योग-एमएसएमई के अतिरिक्त कृषि-बागवानी, पर्यटन और गांवों तक ढांचागत विकास के लिए सेक्टर चिह्नित किए गए हैं। विभागवार पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने की योजना पर भी काम शुरू किया गया है। वर्ष 2000-01 में प्रचलित भावों पर राज्य की कुल जीएसडीपी 14501 करोड़ थी। 2021-22 में जीएसडीपी करीब 2.65 लाख करोड़ हो चुकी है। अब इसे अगले पांच सालों में साढ़े पांच लाख करोड़ करने का लक्ष्य है। इस कार्य के लिए अमेरिकी विशेषज्ञ संस्था मैंकेंजी ग्लोबल की सेवाएं ली जा रही हैं।
संस्था ने वैश्विक निवेशक सम्मेलन का खाका तैयार किया है। दिसंबर में सम्मेलन के माध्यम से एक बार फिर प्रदेश में पूंजी निवेश के लिए तैयारी की जा रही है। देश और विदेश में विभिन्न स्थानों पर रोड शो के माध्यम से अब तक 1.24 लाख करोड़ के निवेश करार हो चुके हैं।
प्रदेश के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए आवश्यक है कि वार्षिक बजट का अधिक सदुपयोग हो। सरकार ने इस बार गंभीर पहल की है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पहली बार ऐसा हुआ कि पहली छमाही में पूंजीगत मद में बजट खर्च के लक्ष्य को प्राप्त करने में सरकार सफल रही। 30 सितंबर तक 4800 करोड़ की राशि खर्च की गई।
केंद्र सरकार ने 4000 करोड़ की राशि खर्च करने का लक्ष्य दिया था। केंद्र ने वार्षिक लक्ष्य 8797 करोड़ रुपये दिया है। चालू वित्तीय वर्ष में पूंजीगत मद में कुल वार्षिक खर्च का लक्ष्य 13 हजार करोड़ रुपये है। सरकार को उम्मीद है कि इस लक्ष्य को समय पर प्राप्त कर लिया जाएगा।
वर्ष - राज्य सकल घरेलू उत्पाद (करोड़ रुपये)
2000-01 - 14501

2001-02 - 15825

2002-03 - 18473

2003-04 - 20438

2004-05 - 24786

2005-06 - 29968

2006-07 - 36795

2007-08 - 45856

2008-09 - 56025

2009-10 - 70730

2010-11 - 83969

2011-12 -1,15,328

2012-13 - 1,31,612

2013-14 - 1,49,074

2014-15 - 1,61,439

2015-16 - 1,77,163

2016-17 - 1,95,125

2017-18 - 2,22,836

2018-19 - 2,45,895

2019-20 - 2,53,666

2020-21 - 2,34,660

2021-22 - 2,65488

2022-23 - 3,02,000 (अनुमानित)

2023-24 - 3,33,000 (अनुमानित)

 



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