बृहस्पतिवार, 8 दिसम्बर 2022 | 06:01 IST
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उत्तराखण्ड के हर ब्लॉक में केन्द्रीय विद्यालय खोलने में क्या अड़चन आई ?


धामी सरकार ने उत्तराखण्ड के हर ब्लॉक में एक केन्द्रीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव बनाया था। ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा में केंद्रीय विद्यालय अस्थाई भवन में शुरू हो चुका है जबकि चंपावत में काम चल रहा है। बाकी स्कूलों के लिए जिलाधिकारियों से ज़मीन मांगी गई थी, लेकिन कई जिलों में ज़मीन ही नहीं मिल पा रही है। अगर कोई स्वयंसेवी संगठन सरकार की इस योजना को आगे बढ़ाए तो हर क्षेत्र में स्कूल खुल सकता है। अभी तक इन जगहों से ही 26 प्रस्ताव मिले हैं।

पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार, थलीसैंण, भरसार, पाबौ ब्लॉक के मिलाई, देहरादून के क्लेमेंटटाउन, चकराता, साहिया, चमोली जिले में देवाल के सवाड, चारपाणी तोक के आमडाला, नंदप्रयाग, ऊधमसिंह नगर जिले में जसपुर, अल्मोड़ा में पाण्डुवाखाल, देघाट, द्वाराहाट, जैंती, टिहरी गढ़वाल में नरेंद्रनगर, कीर्तिनगर के ग्राम गुगली, जौनपुर, मोरी के नानई, बुगीधार, प्रतापनगर के मदननेगी, देवप्रयाग के हिंडोलाखाल, हरिद्वार के लक्सर, ग्राम तुगलपुर, उत्तरकाशी के भटवाड़ी, उपला टकनौर में केंद्रीय विद्यालय के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

हर ब्लॉक में केंद्रीय विद्यालय शुरू करने के पीछे सरकार की मंशा यह है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी और इससे पहाड़ से पलायन भी रुकेगा। प्रदेश सरकार की इस मंशा को केंद्र सरकार ने भी मंजूरी दी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार ने हर ब्लॉक में स्कूलों के लिए मुफ्त भूमि देेने का आश्वासन दिया था लेकिन जिलाधिकारी जमीन उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

जबकि, सच्चाई यह है कि सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे हो रहे हैं। देहरादून जिले में ही सात हजार बीघा सरकारी भूमि पर कब्जे का मामला सामने आ चुका है। इसी तरह अन्य जिलों में भी माफिया लगातार सरकारी जमीन बेच रहे हैं लेकिन स्कूलों के लिए जमीन की व्यवस्था नहीं है।

हाल यह है कि शासन के आदेश के बावजूद सिर्फ 9 जिलों के जिलाधिकारियों ने 26 केंद्रीय विद्यालयों के प्रस्ताव केंद्रीय विद्यालय संगठन को भेजे हैं। अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय विद्यालय के लिए पांच से दस एकड़ जमीन की जरूरत है। इसमें शर्त यह भी है कि जमीन दान में मिली या वन विभाग की नहीं होनी चाहिए।

 

 



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