शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024 | 07:51 IST
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करवा चौथ व्रत और पूजा की विधि, मुहूर्त सब जान लीजिए चंद्रमा को अर्घ्य ऐसे दें


 पति की लंबी उम्र और जन्म-जन्मांतर के प्रेम की प्राप्ति के लिए हर साल सभी सुहागिन महिलाएं करवाचौथ का व्रत रखती हैं. इस साल करवाचौथ एक नवंबर को है. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखते हुए शाम को चंद्रमा के दर्शन करती हैं और फिर विधि विधान से पूजन के बाद व्रत खोलती हैं. मान्यता है कि महिलाओं के नियमपूर्वक व्रत रखने से उनके पति की उम्र लंबी होती है. इस दिन महिलाओं को शाम होते ही चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है. अब आपको बताते हैं कि उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश सहित बाकी शहरों में चंद्रोदय का समय क्या है और पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि भी.
आचार्य प्रमोद शास्त्री ने बताया कि करवाचौथ का व्रत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस साल यह व्रत एक नवंबर को रखा जाएगा. इस दिन सभी सुहागिन अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं. दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को करवा माता, भगवान गणेश, माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करती हैं. फिर चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देती हैं और अपना व्रत खोलती हैं. वह बताते हैं कि हरिद्वार और ऋषिकेश में चंद्रोदय रात 8:02 मिनट पर होगा. पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:34 मिनट से 06: 40 मिनट तक रहेगा.
गौरतलब है कि इस खास दिन पर महिलाएं सूर्योदय से पहले जागकर सास द्वारा दी गई सरगी खाकर व्रत की शुरुआत करती हैं. जिसके बाद वे पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं. शाम के समय दुल्हन की तरह श्रृंगार कर अच्छे से तैयार होती हैं और चांद निकलने का इंतजार करती हैं. चांद निकलने के बाद छलनी से चांद को देखकर, फिर अपने पति की आरती उतारकर अपना व्रत खोलती हैं. इस व्रत को करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान मिलता है. करवा माता उनके सुहाग की सदा रक्षा करती हैं और उनके वैवाहिक जीवन में सदा खुशहाली रहती है.
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
चंद्रमा के निकलने के बाद एक लोटे में जल भरकर रखें. फिर उसमें थोड़े सफेद फूल, कच्चा दूध और अक्षत् डाल दें. उसके बाद चंद्रमा को देखकर अर्घ्य दें. अर्घ्य देने के बाद चंद्रदेव को प्रणाम करें. अपने जीवनसाथी की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें. उसके बाद विधि अनुसार व्रत खोल लें.

 



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