रविवार, 7 जून 2020 | 12:28 IST
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अंतरराष्‍ट्रीय अदालत में भारत की बड़ी जीत, पाकिस्‍तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक


पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से जुड़े मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस(आईसीजे) ने अपना फैसला सुना दिया है। इंटरनेशनल कोर्ट ने उनकी फांसी पर रोक लगा दी है। भारत के हक में फैसला सुनाते हुए इंटरनेशनल कोर्ट ने जाधव को कांस्युलर देने का आदेश भी दिया। कोर्ट के इस फैसले पर पाकिस्तान ने ऐतराज जताया लेकिन आईसीजे ने इसे खारिज कर दिया।  कोर्ट ने कहा पाकिस्तान को अपने फैसले (सजा-ए-मौत) की फिर से समीक्षा करनी चाहिए। नीदरलैंड में द हेग के 'पीस पैलेस' में सार्वजनिक सुनवाई हुई, जिसमें अदालत के प्रमुख न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ में फैसला पढ़कर सुनाया। जिसमें 16 में से 15 जज, भारत के हक में थे। 

आपको बता दें कि ईरान के चाबहार में बिजनेस करने वाले भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को भारत का जासूस बताकर पाकिस्तान ने गहरी साजिश चली थी। भारत ने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब देते हुए साफ कहा था कि उसे अगवा किया गया था। इसीलिए जब पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने उसके लिए सजा-ए-मौत मुकर्रर की तो भारत हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत में गया।

हालांकि, ICJ ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत के फैसले को रद्द करने, जाधव की रिहाई और उन्हें सुरक्षित भारत पहुंचाने की नई दिल्ली की कई मांगों को खारिज कर दिया। फिर भी ICJ का यह फैसला भारत के लिए बड़ी जीत है और पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। कोर्ट ने भारत की अपील के खिलाफ पाकिस्तान की ज्यादातर आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। 

पाकिस्तान ने 3 मार्च 2016 को दावा किया था कि उसने एक रिटायर भारतीय नेवी ऑफिसर को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया है। भारत ने पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि इस्लामाबाद ने रिटायर्ड नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव का ईरान से अपहरण किया गया। जहां वह रिटायरमेंट के बाद कारोबार के सिलसिले में थे। 
भारत ने लगातार पाकिस्तान से यह मांग की कि वह वियना कन्वेंशन के तहत उसे जाधव तक राजनयिक पहुंच मुहैया कराए, लेकिन इस्लामाबाद ने बार-बार इस मांग को खारिज कर दिया। बाद में 2017 में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में फांसी की सजा सुना दी। इस फैसले के खिलाफ 8 मई 2017 को भारत इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस पहुंचा था।



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