बुधवार, 22 मार्च 2023 | 09:30 IST
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की नई थीम क्या है ?


आज की नारी हर मोर्चे पर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है, घर के किचन से लेकर अंतरिक्ष तक नारी पुरुष के बराबर है। हमारे देश के राष्ट्रपति पद पर भी आज एक आदिवासी समाज की महिला द्रौपदी मुर्मू जी बैठी हैं, लेकिन इसके बावजूद लैंगिक समानता की बात आज भी दूर की कौड़ी लगती है। केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लैंगिंग समानता की जरूरत महसूस की जा रही है। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने इस बार 8 मार्च 2023 को अंतर्राषट्रीय महिला दिवस की थीम 'DigitALL: Innovation and technology for gender equality.'' यानी  डिजिटऑल: लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी. रखी है। इसका अर्थ है नए डिजिटल युग में नवाचार और तकनीकी परिवर्तन की शिक्षा महिलाओं के लिए ज़रूरी है।  इसका एक अर्थ ये भी है कि महिलाओं को पुरुषों की बराबरी पर लाने के लिए तकनीकी शिक्षा मुहैया कराई जाए और साथ ही उनकी ज़रूरत वाली तकनीक पर शोध हों। तकनीक ही वो ताकत है, जिसके दम पर महिलाएं पूरी तरह समानता पा सकती हैं।  
जैसा कि आप जानते ही होंगे महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करने के लिए दुनियाभर में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हर साल एक खास थीम पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन होता है। महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाए जाने वाले इस दिन के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जहां महिलाओं से जुड़े हर एक मुद्दों पर बात की जाती है। 
अगर महिला दिवस के शुरुआत की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की मनाने का विचार एक मज़दूर आंदोलन से उत्पन्न हुआ था। साल 1908 में जब 15 हज़ार महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर में रैली निकाली थी, जिनकी मांग थी नौकरी के घंटे कम करना, काम के हिसाब से वेतन देना और साथ ही मतदान का भी अधिकार। इस घटना के ठीक एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमरीका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया। इस सब के बावजूद इसे आधिकारिक मान्यता कई वर्षों बाद 1975 में मिली, इसी वर्ष से संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे एक थीम के साथ मनाने का निर्णय लिया गया था. इसकी सबसे पहली थीम “सेलीब्रेटिंग द पास्ट एंड प्लानिंग फॉर द फ्युचर” थी.
तब से लेकर अब तक महिलाओं की स्थिति में बहुत सुधार आया है। हम देखते हैं भारत में भी शिक्षा और खेल के मैदान से लेकर कारोबार, राजनीति, मनोरंजन जैसे हर क्षेत्र में आज महिलाएं डंका बजा रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए समाज की कई संस्थाएं लगातार योगदान देती रहती हैं, इनमें से एक है दिल्ली की डीपीएमआई संस्था। डीपीएमआई लगातार छात्राओं को आगे बढ़ाने के लिए उनको शिक्षा के साथ कौशल में प्रवीण करके आगे बढ़ा रहा है। आज छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल में शिक्षा देकर उनके शारीरिक, मानसिक , बौद्धिक के साथ तकनीकी कौशल की भी आवश्यकता है। देशभर में फैले डीपीएमआई के 75 से भी ज़्यादा 
सेंटर्स में छात्राओं के लिए कई विशेष कोर्स डिजाइन किए गए हैं, जिनको समय-समय पर अपडेट भी किया जाता है। देश में इंटरनेट और मोबाइल क्रांति ने छात्राओं को तकनीक के रास्ते सूचना के हर संभव क्षेत्र तक पहुंचने का रास्ता सुलभ कराया है। डीपीएमआई के कई यू-ट्यूब चैनल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स भी छात्र-छात्राओं को हर तकनीकी ज्ञान और ट्रेनिंग देकर इस साल की थीम 
'DigitALL: Innovation and technology for gender equality.'' 
को पहले से साकार करते आ रहे हैं। 
तो ऐसे समय में जब भारत पूरी दुनिया में विश्व गुरु बनने की राह पर आगे बढ़ चला है, देश की हर नारी को सम्मान, सुरक्षा और समानता देकर खुद को गौरवान्वित करें। 

 



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