बुधवार, 12 अगस्त 2020 | 07:54 IST
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वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में हार के 5 बड़े कारण


पूरे वर्ल्ड कप में टॉप रही टीम इंडिया आखिरी के सबसे आसान मैच में आकर

सम्मान की लड़ाई हार गई। पूरे हिन्दुस्तान की उम्मीदें चकनाचूर हो हईं। जैसे ही धोनी रन आउट हुए टीवी के सामने बैठे हजारों हिन्दुस्तानी रो पड़े। टॉप पर रही जो टीम वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी दावेदार थी, जिसके बाद दुनिया के टॉप 2 बल्लेबाज थे, जिसके बाद दुनिया का टॉप गेंदबाज था- वो इज्जत बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आई। शायद इसी को कहते हैं क्रिकेट का रोमांच। यही वो उतार चढ़ाव है, जो इस खेल को महान बनाता है। तारीफ करनी होगी न्यूज़ीलैण्ड की जिसने केवल 239 रन बनाकर भारत जैसी दमदार टीम को बाहर कर दिया और लगातार दूसरी बार फाइनल का टिकट कटा लिया।  

 

तो ऐसा क्या हुआ कि टीम इंडिया को सेमीफाइनल से बाहर होना पड़ा। सबसे बड़ा कारण तो सलामी बल्लेबाजों का शर्मनाक आत्मसमर्पण ही है । न्यूजीलैंड के 239 रन के जवाब में टीम इंडिया की शुरुआत बेहद खराब हुई। महज ओवर एक गेंद में भारतीय टीम ने 3 विकेट खो दिए। रोहित, लोकेश और विराट केवल 1-1 रन बनाकर आउट हो गए। मैट हैनरी और ट्रेंट बोल्ट की जोड़ी ने स्विंग गेंदों से कहर बरपा दिया।

इन तीनों के आउट होते ही टीम इंडिया दबाव में आ गई और मोमेन्टम न्यूज़ीलैण्ड की तरफ शिफ्ट हो गया।

आज शिखर धवन की कमी भी खेली, जो बड़े मैच के खिलाड़ी माने जाते हैं। दिनेश कार्तिक से उम्मीदें थीं, काफी गेंद खेलने के बाद भी वो केवल 6 रन बनाकर चल दिए। ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या ने पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन अनुभवहीनता के कारण सेट होने के बाद आउट हो गए। दोनों ने 32-32 रन बनाए जरूर, लेकिन रन रेट नहीं बढ़ा पाए। उसके बाद धोनी ने पारी को संभालने की कोशिश की- रवीन्द्र जडेजा के साथ मिलकर संकट से निकाला। तारीफ करनी होगी रवीन्द्र जडेजा की जिन्होंने 77 रन की धुआंधार पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया, लेकिन धोनी के रन आउट होते ही सारी उम्मीदें ध्वस्त हो गईं।

हार का एक कारण धोनी को ऋषभ पंत की जगह ऊपर न भेजना भी रहा। ऊपर आकर धोनी पारी को संभालते तो विकेट गिरने का सिलसिला रुकता जो आखिरी ओवर्स में काम आता। ऋषभ और हार्दिक बाद में टीम के लिए तेजी से रन बना सकते थे।

 



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