मंगलवार, 24 मई 2022 | 02:26 IST
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उसका अंजाम निर्भया से भी भयानक हुआ, लेकिन आजतक इंसाफ नहीं मिल पाया


निर्भया गैंग रेप के बाद पूरे देश में उबाल आ गया था। जब उसके दोषियों को फांसी की सज़ा हुई तो पूरे देश ने राहत की सांस ली। दरिदों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया। लेकिन निर्भया से पहले भी एक और बेटी किरण नेगी के साथ भी कुछ वैसा ही हुआ था। 9 फरवरी 2012 को उत्तराखण्ड की बेटी किरण नेगी का दिल्ली के नजफगढ़ से अपहरण करके हरियाणा के गांव में लेकर गैंगरेप किया गया। सबूत मिटाने के मकसद से उसकी आंखों और कई अंगों पर तेजाब डाला गया। उसकी हालत ये थी कि पोस्टमॉर्टन करने वाला डॉक्टर भी देखकर बेहोश हो गया था।

रुह कंपा देने वाले इस कांड के बारे में मुख्य धारा के मीडिया ने कभी भी देश को सही तरीके से जानकारी नही दी। समाजसेवी विनोद बछेती और कई और संगठनों ने किरण नेगी के लिए संघर्ष किया और आखिरकार हाई कोर्ट ने 2014 में फांसी की सजा सुना दी। लेकिन फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और फिर लटक गया। किरण नेगी को न्याय दिलाने के लिए हर साल समाजसेवी विनोद बछेती कैंडल मार्च निकालते हैं... बछेती जी का कहना है कि अगर समय रहते इस भयानक कांड पर मीडिया और पुलिस ने ध्यान दे दिया होता तो शायद निर्भया चौकन्नी हो जाती और बच जाती।

वरिष्ठ समाज सेवी विनोद बछेती दिल्ली और एनसीआर की तमाम संस्थाओं के साथ मिलकर किरण नेगी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे है...इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली एनसीआर के तमाम उत्तराखंडी संस्थाओं सहित सभी सक्रिय भूमिका निभाने वाले समाजसेवी विनोद बछेती ने साथियों की एक बैठक भागीरथी हाल गढ़वाल भवन मे शुक्रवार को हुई जिसमें किरण नेगी को न्याय दिलाने के लिए चर्चा हुई। किरण की गैंग रेप के बाद मौत कोई सामान्य घटना नहीं थी। किरण एक ऑफिस जाने वाली सपने देखने वाली मिडिल क्लास लड़की थी। पिता सेक्योरिटी गार्ड थे इसलिए उसे यही लगता था कि जल्द से जल्द एक घर खरीदना है और अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठानी है। लेकिन किरण नेगी के सपने....9 फरवरी 2012 को उस वक्त चकना चूर हो गए जब... किरण भी अपने ऑफिस से घर  की ओर आ रही थी कि तभी उसका अपहरण कर लिया गया। इसके बाद हरियाणा ले जाकर उन दरिंदों ने उसका तीन दिन तक रेप किया। फिर अंत में उसे सरसों के खेत में मरने के लिए छोड़ दिया....बेटी को तलाश करते माता पिता ने जब अपनी बेटी दर्दनाक मौत को देखा तो पूरा परिवार टूट गया.. किरण के अपहरण के बाद उसकी सहेलियों ने यह सूचना उसके घरवालों और पुलिस की दी थी। लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अंत में उत्तराखंड समाज के लोगों को इस घटना का विरोध करने के लिए सड़कों पर आना पड़ा, जिसकी वजह से पुलिस हरकत में आई और मामले पर कार्रवाई की।



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