बुधवार, 20 नवंबर 2019 | 11:48 IST
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उत्तराखंड में पेड़ों पर लगे बिजली के तार,विज्ञापन बोर्डों और कीलों को तुरंत हटाए-नैनीताल हाईकोर्ट


नैनीताल हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के सभी पेड़ों से विज्ञापन बोर्ड और कीलों को हटवाने के आदेश दिए हैं। उत्तराखंड के पेड़ों में बिजली के तार समेत विज्ञापन बोर्ड लगाने का मामला नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कुमाऊं कमिश्नर और गढ़वाल कमिश्नर को आदेश दिए हैं कि दो महीने के भीतर प्रदेश के पेड़ों से विज्ञापन बिजली के तार समेत पेड़ों में गाड़ी गई किले हटाए।

हाईकोर्ट ने कमिश्नर गढ़वाल और कुमाऊं को आदेश दिए हैं की पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के विरुद्ध वृक्ष संरक्षण अधिनियम और उत्तराखंड सार्वजनिक संपत्ति संरक्षण अधिनियम 2003 के अंतर्गत मुकदमा भी दर्ज करवाएं। वहीं कोर्ट ने प्रदेश के सभी डीएम को आदेश दिए हैं कि वो किसी भी स्थिति में पेड़ों में बिजली की तार और विज्ञापन ना लगने दें जिसके लिए वह खुद मॉनिटरिंग भी करेंगे।

मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने प्रदेश के सभी सरकारी विभागों को आदेश दिए हैं कि उनके द्वारा लगाए गए सभी विज्ञापन वो खुद दो महीने के भीतर हटा ले।

आपको बता दें कि हल्द्वानी निवासी अमित खोलिया ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि लोगों ने प्रदेश भर के पेड़ों में विज्ञापन बिजली के तार समय किले लगाई दी हैं। जिनसे पर्यावरण को क्षति हो रही है, लिहाजा प्रदेश के पेड़ों से बिजली के तार, व्यवसायिक विज्ञापन ओर किलो को हटाए। जिसके लिए वह लंबे समय से प्रदेश के अधिकारियों को बोल रहे थे। लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी जिसके बाद उनको अंत में हाईकोर्ट की शरण में आना पड़ा। जहां गुरूवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कमिश्नर कुमाऊं और गढ़वाल को पेड़ों से हार्डिंग और बिजली की तार हटाने के आदेश दिए हैं।



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