सोमवार, 23 सितंबर 2019 | 11:06 IST
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डॉ. हरिसुमन बिष्ट को रवींद्रनाथ टैगौर अंतरराष्ट्रीय सम्मान


डॉ. हरिसुमन बिष्ट को रवींद्रनाथ टैगौर अंतरराष्ट्रीय सम्मान


 द्वितीय गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगौर अंतरराष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार-2019 के लिए प्रतिष्ठित कथाकार, लेखक, नाट्यलेखक डॉ. हरिसुमन बिष्ट को चुना गया है।
दिल्ली सरकार में सचिव, हिन्दी अकादमी के रूप में उल्लेखनीय कार्य कर चुके श्री बिष्ट की प्रमुख कृतियाँ हैं - उपन्यास- (1) ममता (2)आसमान झुक रहा है (3)होना पहाड़ (4)आछरी-माछरी (5) बसेरा(6) भीतर कई एकांत । कथा संग्रह - (1)सफेद दाग (2)आग और अन्य कहानियाँ 3)मछरंगा (4)बिजूका (5)मेले की माया (नव साक्षरों के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित) (6)उत्तराखण्ड की लोक कथाएं (2011(नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित) । यात्रा-वृतांत-(1)अन्तर्यात्रा (1998) बांग्ला में अनुवाद ‘आमार ए पोथ‘ (2014)। नाटक- 'ख्वाब एक उड़ता हुआ परिन्दा था '(2012) । उन्होंने कुमांउनी के सुप्रसिद्ध कवि दिवान सिंह की पुस्तक ‘‘दिवानी विनोद’’ का हिन्दी में अनुवाद भी किया है।
श्री बिष्ट द्वारा संपादित तथा प्रो हेमचंद्र पांडे द्वारा मूल रूसी से अनुदित कहानी संग्रह "अपनी जबान में कुछ कहो" को 1984 का सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला। इसके अलावा डॉ बिष्ट को ‘आराधक श्री’ सम्मान, ‘डॉ. अम्बेडकर सेवाश्री’ सम्मान, ‘रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान’, हिन्दी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान, शैलेश मटियानी स्मृति चित्रा कुमार कथा पुरस्कार, सृजनगाथा डॉट कॉम सम्मान, रत्न भारती सम्मान, स्वर्गीय पंडित रामनारायण दाधीच स्मृति सम्मान, विजय वर्मा कथा सम्मान-2014 आदि महत्वपूर्ण सम्मानों-पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है ।
इसके पूर्व वें ताशकंद-समरकंद उज्बेकिस्तान, इजिप्ट, रूस में संपन्न अंहिंस तथा नवें विश्व हिन्दी सम्मेलन, जोहान्सबर्ग में उल्लेखनीय शिरक़त कर चुके हैं ।
चयन-समिति के संयोजक जयप्रकाश मानस ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि श्री बिष्ट को 51,000 रूपयों की प्रतीक राशि, मानपत्र एवं प्रतीक चिन्ह सहित यह पुरस्कार आगामी 7 जून के दिन 17 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन (ग्रीस, एथेंस) के अवसर पर समारोह पूर्वक दिया जायेगा ।
सृजनगाथा डॉट कॉम के तत्वाधान में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर अंतरराष्ट्रीय सम्मान’ प्रतिवर्ष उस वरिष्ठ रचनाकार को प्रदान किया जाता है जिसने साहित्य की विविध अनुशासनों में अप्रतिम और समानांतर रचनात्मक लेखन किया हो जिससे भारतीय जीवन मूल्यों के साथ वैश्विक जीवन की प्रगतिशीलता भी अपनी नयी संभावनाओं के साथ स्थापित की हो ।



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