बृहस्पतिवार, 17 अक्टूबर 2019 | 06:29 IST
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विधायकों के कथित खरीद-फरोख्त स्टिंग मामले में एक अक्टूबर होगी अब सुनवाई


हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग और विधायकों के खरीद फरोख्त के मामले में आज संक्षिप्त सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए एक अक्टूबर की तारीख तय की गई है। आज न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष हुई। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवीदत्त कामथ ने रावत की तरफ से बहस की। सीबीआई के वकील ने कहा कि रावत जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। जबकि रावत के वकील ने कहा कि सहयोग कर रहे हैं।

पूर्व की सुनवाई में सीबीआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश कर कहा था कि वे हरीश रावत के  खिलाफ  एफआईआर दर्ज करने जा रहे हैं। जबकि कोर्ट ने पूर्व में सीबीआई को निर्देश दिए थे कि उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पहले कोर्ट को अवगत कराएं। इसी के क्रम में सीबीआई की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया था। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने याचिका दायर कर कहा था कि 2017 में कांग्रेस की सरकार गिरने पर उनके स्टिंग और विधायकों की खरीद फरोख्त मामले में प्रारंभिक जांच पर रोक लगाई जाए

आपको बता दें कि वर्ष 2017 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त का कथित मामला सामने आया था। जिसके बाद उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार गिरी और राष्ट्रपति शासन लगाया गया। सरकार गिरने के बाद राज्यपाल की संस्तुति से हरीश रावत पर सी.बी.आई.जांच शुरू हुई। सी.बी.आई.हरीश रावत की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही थी,लेकिन इस बीच हरीश रावत ने स्टिंग को फर्जी बताते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली और अपनी गिरफ्तारी पर रोक और सी.बी.आई.जांच को खत्म करने की मांग की। मामले की सुनवाई करते हुए पूर्व में न्यायालय की एकल पीठ ने हरीश रावत को सी.बी.आई.जांच में सहयोग करने के आदेश दिए थे। साथ ही सी.बी.आई.को निर्देश दिए थे कि वो हरीश रावत की गिरफ्तारी न करें। इसके अलावा सी.बी.आई.को आदेश दिए थे कि अगर हरीश रावत की गिरफ्तारी करने की जरूरत पड़ेगी तो सी.बी.आई.गिरफ्तारी से पहले न्यायालय की एकल पीठ को अवगत कराएगी, जिसके बाद से सी.बी.आई.मामले की जांच कर रही थी। इसके अलावा स्टिंग मामले में 15 जून 2017 की कैबिनेट बैठक में हरीश रावत पर चल रही सी.बी.आई.जांच को हटाकर जांच एस.आई.टी.से कराने का फैसला लिया गया था।

इस निर्णय को हरक सिंह रावत ने उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए कहा कि अगर राज्यपाल किसी मामले में एक बार सी.बी.आई.जांच की संस्तुति दे देते हैं तो उसे हटाया नहीं जा सकता। लेकिन राज्य सरकार द्वारा 15 जून को हुई बैठक में हरीश रावत पर चल रही सी.बी.आई.जांच को हटाने की संस्तुति कर दी, जो नियम विरुद्ध है। साथ ही हरक सिंह रावत ने हरीश रावत पर एफ.आई.आर.दर्ज करने की मांग की थी। जिसके बाद से मामला सी.बी.आई.के पाले में था और सी.बी.आई.मामले में गहनता से विधायकों की खरीद-फरोख्त पर जांच कर रही थी। अब लगभग डेढ़ से अधिक वर्ष बाद सी.बी.आई.ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है।अब मामले में 20 सितंबर यानी आज सुनवई होनी तय थी। जिसकी सुनवाई अब एक अक्टूबर को होगी।



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