सोमवार, 22 जुलाई 2019 | 10:11 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
चांद पर चला चंद्रयान-2, ISRO ने फिर रच दिया इतिहास,देशभर में खुशी की लहर          81 साल की उम्र में शीला दीक्षित का निघन          शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं थी          दिल्ली की सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का दिल्ली में निधन          इसरो ने किया ऐलान, अब 22 जुलाई को लॉन्च होगा चंद्रयान-2          कुलभूषण जाधव मामले पर पीएम मोदी ने जताई खुशी कहा- ये सच्चाई और न्याय की जीत है          भारतीय वायुसेना के लिए गेम चेंजर साबित होगी राफेल-सुखोई की जोड़ी,एयर मार्शल भदौरिया          कुलभूषण जाधव केस, ICJ में भारत की बड़ी जीत, फांसी की सजा पर रोक, पाकिस्तान को सजा की समीक्षा का आदेश          गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान, कहा- सभी घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को करेंगे देश से बाहर          पीएम नरेंद्र मोदी सितंबर में अमेरिका जाएंगे, जहां भारतीय समुदाय के लोगों से उनकी मुलाकात हो सकती है। इस दौरान दुनिया के कई अन्‍य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की संभावना है          भाजपा को 2016-18 के बीच 900 करोड़ रू से ज्यादा चंदा मिला, एडीआर की रिपोर्ट में आया सामने          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार          बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने किया तेज सेना का गठन           भ्रष्ट अफसरों को जबरन वीआरएस दिया जाए, ऐसे लोग नहीं चाहिए-योगी आदित्यनाथ         
होम | उत्तराखंड | हम चुनाव क्यों हारे,बाबा केदार से पूछेंगे-हरीश रावत

हम चुनाव क्यों हारे,बाबा केदार से पूछेंगे-हरीश रावत


हम चुनाव क्यों हारे,बाबा केदार से पूछेंगे-हरीश रावत

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बहुत जल्द बाबा केदार की शरण में जाने वाले है। इसकी वजह कुछ खास है। दरअसल हरीश रावत पहले विधानसभा और अब लोकसभा चुनाव में पराजय झेल चुके है। हरीश रावत उत्तराखंड के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले ऐसे राजनीतिज्ञ माने जाते हैं, जो अपने प्रतिद्वंदियों से मात खाने के बाद हर बार और मजबूत होकर उभरे और केंद्र में कैबिनेट मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद अंतत: प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। लेकिन अब यही हरीश रावत बाबा केदार के दरबार में पहुंच कर बाबा केदार से जानना चाहते हैं कि आखिर मुझसे क्या भूल हो गई बाबा की मुझे सिर्फ हार ही हार मिल रही है।

हरीश रावत कब केदारा बाबा के दरबार में जाएंगे। इसका दिन और समय अभी तय नहीं है। लेकिन मीडिया से एक  अनौपचारिक बातचीत में रावत ने कहा कि, 'मैं बाबा से पूछना चाहता हूं कि भगवन कहां गलती हो गई।' उन्होंने यह भी कहा कि वह चुनाव हारे हैं ये महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण ये है कि उत्तराखंडियत भी हार रही है।

लोकसभा की नैनीताल सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भले ही बड़े अंतर से चुनाव हारे हों, मगर उनके चेहरे पर शिकन नजर नहीं आती है। इसके बाद भी उन्होंने देहरादून और हरिद्वार में विभिन्न कार्यक्रमों में न सिर्फ शिरकत की, बल्कि राज्य व केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। साथ ही हार को लेकर अपने अंदाज में तर्क भी दिए।

मीडिया से अनौपचारिक बातचीत मैं रावत ने कहा कि, 'मैं समझता था कि 2017 का विधानसभा चुनाव इत्तेफाक हो सकता है। तब एक नारा डबल इंजन का दिया गया था। शायद उससे लोगों को लगा कि बेहतर सपना है वह पूरा हो रहा है, लेकिन दो ढाई साल में यह सपना बिखर गया। इसके साथ ही उत्तराखंडियत भी बिखर रही है।' उन्होंने कहा कि केदारनाथ जाकर वह बाबा से पूछेंगे कि कहां गलती हो गई। साथ ही जोड़ा कि प्रधानमंत्री तीन-चार बार केदारनाथ आ चुके हैं, मगर केदारनाथ में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

 हरीश रावत ने भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के उस बयान पर भी चुटकी ली, जिसमें उन्हें हारदा कहा गया था। रावत ने कहा कि भाजपा के कुछ नेता उन्हें हारा हुआ बता चुटकी ले रहे हैं। लेकिन उन्हें मैं कहना चाहता हूं कि हार-जीत चुनाव का हिस्सा है। उन्हें समझ लेना चाहिए कि उनकी यह जीत हमेशा के लिए नहीं है। कांग्रेस पुरानी पार्टी है और वह वापसी करना अच्छे से जानती है। उन्होंने भाजपा को अपने पुराने दिन न भूलने की  नसीहत दी।

 



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: