रविवार, 17 नवंबर 2019 | 07:19 IST
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स्वर कोकिला लता मंगेशकर की हालत नाजुक, देश भर दुआओं का दौर जारी           महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश, मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी          अयोध्या में ही मस्जिद निर्माण के लिए दी जाएगी जमीन          सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर रामलला का हक माना          कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व विभाग की खोज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता          कोर्ट ने कहा,विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था          कोर्ट के फैसले में ASI का हवाला देते हुए कहा गया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण किसी खाली जगह पर नहीं किया गया था          अयोध्या पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बनेगा राम मंदिर, मस्जिद के लिए अलग जगह          मोदी सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली की अवैध कॉलोनियां होगी नियमित          पीओके से आए 5300 कश्मीरियों के लिए मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेंगे साढ़े पांच लाख रुपये          केंद्र सरकार ने 48 लाख कर्मचारियों को दिवाली से पहले दिया बड़ा तोहफा, 5 फीसदी बढ़ाया महंगाई भत्ता           देश के सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक पब्लिक प्रॉविडेंट फंड पर सेविंग अकाउंट की तुलना में दे रहा है डबल ब्याज           पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कबूल किया कि उनका देश कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिशों में नाकाम रहा          संयुक्‍त राष्‍ट्र ने भी माना,जलवायु परिवर्तन से निपटने में अहम है भारत की भूमिका          महाराष्ट्र, हरियाणा में 21 अक्टूबर को होगा विधानसभा चुनाव, 24 को आएंगे नतीजे          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार         
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दमदार रहा गढ़वाली-कुमाउनी कक्षाओं का चौथा सप्ताह


उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली, ‘उत्तराखण्ड एकतामंच दिल्ली’ ,’डीपीएमआई’  एवं ‘हिमालयन न्यूज’ के द्वारा 19 मई 2019 से दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में लगभग 30  स्थानों पर गढ़वाली-कुमाउनी कक्षाएं चलाई जा रही हैं। प्रत्येक रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलने वाली इन कक्षाओं में दिल्ली सहित पूरे एनसीआर के कई सेन्टर्स में बच्चे बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। इसी तरह न्यू अशोक नगर, नरेला, लोनी रामपार्क, रोहिणी, त्रिलोकपुरी, लोदी रोड, मयूर विहार, गजियाबाद आदि सभी गढ़वाली-कुमाउनी कक्षाओं की शाखाओं के द्वारा लगातार चौथे सप्ताह भी पहाड़ी बोलियों को बचाने के लिए ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का आयोजन किया गया। उत्तराखड़ी परम्परा को सुदृढ़ करने के इस महत्वपूर्ण कार्य में उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली और उत्तराखंड एकता मंच, डीपीएमआई का भी अहम योगदान मिल रहा है।  इन्ही के द्वारा कक्षाओं के संचालन हेतु उपयोगी प्रशिक्षण सामग्री भी निशुल्क प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही बच्चे भी खूब बढ़-चढ़ के हिस्सा ले रहे हैं।इस तरह उत्तराखंडी नौनिहालों को अपनी बोली-भाषा और संस्कृति से जोड़ने का उद्देश्य बखूबी पूरा हो रहा है।    



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