मंगलवार, 21 जनवरी 2020 | 06:36 IST
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बवासीर और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए रामबाण औषधि है उत्तराखंड में पाए जाने वाली गींठी


उत्तराखंड प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता के साथ ही यहां मिलने वाली जड़ी-बूटियों के लिए भी प्रसिद्ध है। देवभूमि में मिलने वाली जड़ी-बूटियों में जीवनदायिनी शक्ति है। पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में आज भी इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इन्हीं जड़ी-बूटियों में से एक है पहाड़ में मिलने वाला जंगली फल गीठीं। इसके औषधीय गुणों के बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। ऐसी कोई बीमारी नहीं, जिसे ठीक करने की ताकत गीठीं में ना हो। ये पहाड़ में मिलने वाला कंदमूल फल है, जो कि आमतौर पर जंगलों में मिलता है। औषधीय गुणों के चलते गीठीं की डिमांड बढ़ रही है, यही वजह है कि पहाड़ के कुछ लोग घरों में गीठीं की खेती कर रहे हैं।

कैंसर, कब्ज, अल्सर, बवासीर का अचूक इलाज है गेंठी (गींठी) की सब्जी कुदरती सब्जी, अल्सर, गेंठी (गींठी), दक्षिण पूर्व एशिया, औषधीय उपयोग, च्यवनप्राश, विटामिन बी-12, वलवीफेरा, बवासीर, कुदरत ने उत्तराखंड को कुछ ऐसे अनमोल तोहफे दिए हैं, जिनमें अद्भुत गुणों की भरमार है। इस बीच हैरानी की बात तो ये भी है कि आधुनिकता की इस दौड़ में हम लगातार इन अनमोल संपदाओं को भूलते जा रहे हैं। आज हम आपको पहाड़ में उगने वाली ऐसी ही एक कुदरती सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं। जो आपके शरीर में मौजूद पेट की बीमारी को पल भर में दूर सकती है। पेट की बीमारी …यानी कब्ज, बवासीर, दस्त और अल्सर। ये ऐसी बीमारियां हैं जो इंसान को काफी तकलीफ देती हैं। इस सब्जी का नामं है गेंठी (गींठी) की सब्जी। इस कंद की सब्जी भी कहा जाता है। अपने आप में ये कई कुदरती खूबियों को समेटे हुए है। बताया जाता है कि इस सब्जी को दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में भी उगाया जाता है। खास बात ये भी है कि चरक संहिता और सुश्रुवा संहिता में गेंठी (गींठी) का स्थान दिव्य अट्ठारह पौधों में दिया गया है।

गींठी की सब्जी को कंद की सब्जी भी कहा जाता है। अपने आप में ये कई कुदरती खूबियों को समेटे हुए है। इस सब्जी को दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में भी उगाया जाता है। खास बात ये भी है कि चरक संहिता और सुश्रुवा संहिता में गेंठी (गींठी) का स्थान दिव्य अट्ठारह पौधों में दिया गया है।  



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