रविवार, 17 नवंबर 2019 | 07:15 IST
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गढ़वाली,कुमाँऊनी एवं जौनसारी भाषा अकादमी के गठन में योगदान के लिए उत्तराखंड वासियों का आभार


विनोद बछेती के कुशल संजोयन एवं ‘उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली’ एवं ‘उत्तराखंड एकता मंच के तत्वावधान में उत्तराखंडी समाज व संस्कृति से जुड़े संगठनों,पदाधिकारियों एवं असंख्य सदस्यों का दिल्ली में गढ़वाली,कुमाँऊनी एवं जौनसारी अकादमी गठित कराने  में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उत्तराखंड एकता मंच के हजारों कार्यकर्ताओं अपनी भाषा-बोली और दिल्ली में अपनी भाषा आकदमी के गठन के लिए रात-दिन संघर्ष किया। भूखे-प्यासे रहे आज उसी का सुफल परिणाम हैं कि आज दिल्ली में गढ़वाली,कुमाँऊनी एवं जौनसारी भाषा अकादमी  के गठन के लिए सरकार ने कदम बढ़ाए है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की चुनी हुई सरकार ने अभी हाल में ही गढ़वाली,कुमाँऊनी एवं जौनसारी भाषा अकादमी के गठन की घोषणा की है। जिसका प्रत्येक उत्तराखंड़ी स्वागत करता है। उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भाषाओं,कला एवं संस्कृति के सरंक्षण व संवर्धन की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है।

‘उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली’,’उत्तराखंड एकता मंच’ ने समय-समय पर यहां के समाज व संस्कृति में विशेष योगदान देने वाले कलाकारों,रचनाकारों व विशेष व्यक्तियों को सम्मानित किया। ऐसे सम्मान समारोहों के दौरान दिल्ली में एक अकादमी की आवश्यता महसूस की गई। इसी के साथ विनोद बछेती जी सन् 2016 से दिल्ली-एनसीआर में अपनी भाषा-बोली के संरक्षण के लिए पहाड़ के बच्चों को उत्तराखंडी भाषा-बोली सीखाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इस का परिणाम हैं कि आज दिल्ली-एनसीआर में रह रहे। उत्तराखंड के बच्चे अपनी भाषा-बोली में आपस में बात कर रहे है। साथ ही अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपनी भाषा-बोली बोलने के प्रोत्साहित भी कर रहे है।

आपको यह भी बता दें कि दिल्ली सरकार में 2017-2018 में कला,संस्कृति व भाषा विभाग में विशेष सचिव रहे श्री कुलानंद जोशी जी ने अकादमी की स्थापना में सकारात्मक भूमिका निभाई। श्री कुलानंद जोशी जौनसारी मूल के आइएएस अफसर हैं जो कि स्वयं जौनसारी लोक भाषा के लोक गायक व गीतकार भी है। जिन्होंने गढ़वाली,कुमाँऊनी एवं जौनसारी भाषा अकादमी के गठन में  महत्वपूर्ण  योगदान दिया।



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