बुधवार, 28 अक्टूबर 2020 | 11:31 IST
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अद्भुत ,प्लास्टिक कचरा लाइए और भरपेट खाना खाइए


आज के समय में प्लास्टिक ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। अमूमन हर चीज़ के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है, वो चाहे दूध हो, तेल, घी, आटा, चावल, दालें, मसालें, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, स्नैक्स, दवायें, कपड़े हों या फिर ज़रूरत की दूसरी चीज़ें सभी में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है। बाज़ार से फल या सब्ज़ियां ख़रीदो, तो वे भी प्लास्टिक की ही थैलियों में ही मिलते हैं। प्लास्टिक के इस्तेमाल की एक बड़ी वजह यह भी है कि टिन के डिब्बों, कपड़े के थैलों और काग़ज़ के लिफ़ाफ़ों के मुक़ाबले ये सस्ता पड़ता है। पहले कभी लोग राशन, फल या तरकारी ख़रीदने जाते थे, तो प्लास्टिक की टोकरियां या कपड़े के थैले लेकर जाते थे। अब ख़ाली हाथ जाते हैं, पता है कि प्लास्टिक की थैलियों में सामान मिल जाएगा। अब तो पत्तल और दोनो की तर्ज़ पर प्लास्टिक की प्लेट, गिलास और कप भी ख़ूब चलन में हैं। लोग इन्हें इस्तेमाल करते हैं और फिर कूड़े में फेंक देते हैं। लेकिन इस आसानी ने कितनी बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है, इसका अंदाज़ा अभी जनमानस को नहीं है।

प्लास्टिक और पॉलिथीन का प्रयोग पर्यावरण और मानव की सेहत दोनों के लिए खतरनाक है। कभी न नष्ट होने वाली पॉलिथीन भूजल स्तर को प्रभावित कर रही है। देखा जा रहा है कि कुछ लोग अपनी दुकानों पर चाय प्लास्टिक की पन्नियों में मँगा रहे हैं। गर्म चाय पन्नी में डालने से पन्नी का केमिकल चाय में चला जाता है, जो बाद में लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाता है। चिकित्सकों ने प्लास्टिक के गिलासों और पॉलिथीन में गरम पेय पदार्थों का सेवन न करने की सलाह दी है।

लेकिन इस प्लास्टिक की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए दुनिया में कई लोगों आज भी निरंतर काम कर रहे है। भारत में भी कई संस्थाएं ऐसी हैं जो प्लास्टिक से होने वाली घातक बीमारियों के बारे में बता कर लोगों को जागरूक कर रहे है। साथ ही प्लास्टिक को खत्म करने के लिए तरह-तरह की योजनाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे है।

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में देश की पहली गार्बेज कैफे योजना शुरू की गई है। इसके तहत नगर निगम शहर के गरीब और बेघर लोगों को प्लास्टिक के बदले भोजन कराएगा। अभियान के तहत सड़क पर बिखरे एक किलो प्लास्टिक कैरी बैग लाने पर मुफ्त भोजन और आधा किलो प्लास्टिक कैरी बैग लाने पर भर पेट नाश्ता कराया जाएगा। शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड से इसका संचालन किया जाएगा।

गार्बेज कैफे के तहत इस अभियान को शुरू करने वाला अंबिकापुर देश का पहला शहर होगा। अब तक किसी निगम में यह व्यवस्था नहीं है। इस के साथ ही इस योजना के तहत बेघर लोगों के खाने और रहने का प्रबंध किया जाएगा। इस योजना को स्वच्छता अभियान से जोड़ा जा रहा है। अंबिकापुर स्वच्छता अभियान में देश में दूसरे नंबर पर है।

ऐसा दावा किया जाता है कि प्लास्टिक के मिश्रण से प्रदेश में सबसे पहली सड़क यहीं बनाई गई थी। यहाँ पहले ही प्लास्टिक कैरी बैग को प्रतिबंधित कर दिया गया है। गार्बेज कैफे से इसे जोड़कर इसे और सख्ती से अमल कराया जाएगा। अभियान के तहत प्लास्टिक कैरी बैग से ग्रेनुअल तैयार कर डामर वाली सड़क में उपयोग किया जाता है।

8 लाख किलो प्लास्टिक के मिश्रण से प्रदेश में पहली सड़क यहीं बनाई गई है। प्लास्टिक के मिश्रण से बनने वाली सड़क टिकाऊ होती है, क्योंकि इससे पानी अंदर नहीं जाता है। ऐसे में लोग जो प्लास्टिक इकट्‌ठा कर निगम को देंगे। इसका उपयोग रिसाइकिल के बाद ग्रेनुअल तैयार कर सड़कें बनाने में होगा।

सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल होगी प्लास्टिक
इसकी खास बात यह है कि इस प्लास्टिक को सड़क निर्माण के काम में इस्तेमाल किया जाएगा। कैफे को अंबिकापुर शहर के मुख्य बस अड्डे से संचालित किया जाएगा। इस पहल के तहत एक किलो प्लास्टिक कचरा लाने वाले लोगों को पूरा भोजन कराया जाएगा। 

500 ग्राम कचरे के बदले मिलेगा नाश्ता
वहीं जो लोग 500 ग्राम कचरा लेकर आएंगे उन्हें नाश्ता दिया जाएगा।अंबिकापुर को इंदौर के बाद देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। इस कैफे में इकट्ठा होने वाले प्लास्टिक को सड़क बनाने के काम में लगाया जाएगा। इससे पहले भी शहर में प्लास्टिक के टुकड़ों और डामर से सड़क बनाई गई है। 

बता दें बजट में इस गार्बेज कैफे के लिए 5 लाख रूपये दिए गए हैं। इसके तहत नगर निगम गरीब और बेघर लोगों को मुफ्त में खाना खिलाएगी। साथ ही यह भी योजना है कि गरीब और बेघर लोगों को मुफ्त शरण दी जाएगी। 

 



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